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महामृत्युंजय जप विधि — संख्या, समय और गृह अनुशासन
महामृत्युंजय जप कैसे बैठें: संकल्प, रुद्राक्ष माला, पूर्व या उत्तर मुख, और 108 पाठ के बाद वैकल्पिक हवन।
समय: 30–60 मिनट

महामृत्युंजय जाग्रत जीवन की प्रार्थना है — स्वास्थ्य, भय के किनारे साहस, और असावधानी से मुक्ति। सोमवार, श्रावण और ब्रह्म मुहूर्त इसे अच्छी तरह धारण करते हैं।
सामग्री
- शिव चित्र या लिंग, बेलपत्र और रुद्राक्ष माला
- जप से पूर्व संक्षिप्त अभिषेक हेतु दूध और जल
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
संख्या का संकल्प
उद्देश्य कहें — स्वास्थ्य लाभ, वृद्ध की रक्षा, या दैनिक अनुशासन — और संख्या: 11, 21, 108, या शक्ति अनुसार 1,250। ऐसी संख्या न बाँधें जिसे चिड़चिड़ाहट में छोड़ दें।
- 2
संक्षिप्त शिव पूजा
जल, दूध और बेल अर्पित करें। दीप जलाएँ। स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तर मुख बैठें।
- 3
जप
रुद्राक्ष माला से स्पष्ट उच्चारण करें। श्वास छोटे पड़ें तो रुकें — अक्षर दौड़ाने नहीं।
- 4
वैकल्पिक हवन और समापन
सोमवार को घी, बेल और काले तिल का छोटा हवन हो सकता है। अन्यथा शिव आरती और मौन बैठक से समाप्त करें।
मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- मंत्र का पाठ क्या है?
- पारंपरिक श्लोक यथावत रखें — नीचे दिया है। गुरु का उच्चारण सहयोग मिले तो वह वरदान है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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