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vishnu · stories

पद्मिनी एकादशी कथा — दुर्लभ अधिक मास एकादशी

अधिक मास की शुक्ल एकादशी, जो अधिक मास के संग ही आती है — अनेक यज्ञों के तुल्य कही गई व्रत।

देव चित्र
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

पद्मिनी दुर्लभ है, जैसे अतिरिक्त मास वाले वर्ष में कमल। कथा अतिरिक्त कृतज्ञता माँगती है, अतिरिक्त अहंकार नहीं।

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जब चांद्र वर्ष अधिक मास जोड़ता है, उसकी शुक्ल एकादशी पद्मिनी कहलाती है। कृष्ण–युधिष्ठिर संवाद फल को यज्ञ, तप और तीर्थ के योग जैसा कहता है — आश्चर्य की भाषा, व्यापार की नहीं। दिन दुर्लभ हो तो डींग का लोभ आता है। कथा डींग वर्जित करती है।

किसी भी विष्णु एकादशी की तरह रखें: सात्विक अन्न या वह व्रत जो पूरा हो, तुलसी, दान। इस वर्ष पद्मिनी न पड़े तो साधारण एकादशी पर्याप्त है। दुर्लभता पद नहीं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मिनी कितने अंतर पर आती है?
केवल अधिक मास में, प्रायः दो-तीन वर्ष में। पंचांग देखें; तिथि गढ़ें नहीं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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