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पद्मिनी एकादशी कथा — दुर्लभ अधिक मास एकादशी
अधिक मास की शुक्ल एकादशी, जो अधिक मास के संग ही आती है — अनेक यज्ञों के तुल्य कही गई व्रत।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14

पद्मिनी दुर्लभ है, जैसे अतिरिक्त मास वाले वर्ष में कमल। कथा अतिरिक्त कृतज्ञता माँगती है, अतिरिक्त अहंकार नहीं।
जब चांद्र वर्ष अधिक मास जोड़ता है, उसकी शुक्ल एकादशी पद्मिनी कहलाती है। कृष्ण–युधिष्ठिर संवाद फल को यज्ञ, तप और तीर्थ के योग जैसा कहता है — आश्चर्य की भाषा, व्यापार की नहीं। दिन दुर्लभ हो तो डींग का लोभ आता है। कथा डींग वर्जित करती है।
किसी भी विष्णु एकादशी की तरह रखें: सात्विक अन्न या वह व्रत जो पूरा हो, तुलसी, दान। इस वर्ष पद्मिनी न पड़े तो साधारण एकादशी पर्याप्त है। दुर्लभता पद नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- पद्मिनी कितने अंतर पर आती है?
केवल अधिक मास में, प्रायः दो-तीन वर्ष में। पंचांग देखें; तिथि गढ़ें नहीं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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