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विष्णु पूजा विधि — गुरुवार गृह पूजा
गुरुवार गृह विष्णु पूजा विधि — तुलसी, पीला वस्त्र, सात्विक नैवेद्य और नारायण स्मरण; क्यों और कैसे स्पष्ट।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-18
समय: 30–45 मिनट

गुरुवार व्यापक रूप से विष्णु का दिन माना जाता है। सरल गृह बैठक में तुलसी दल, स्वच्छ पीला या श्वेत वस्त्र, दीप और नाम — ॐ नमो नारायणाय या लघु विष्णु आरती। लक्ष्य गृह जीवन में मन की स्थिरता और धर्म है, प्रदर्शन नहीं। व्रत की रीति स्थानीय देखें; कई हलका सात्विक दिन रखते हैं। नीचे चरण देखें; सामग्री और प्रश्नोत्तर नवसाधक के मुख्य संदेह सुलझाते हैं।
सामग्री
जो अभी बाकी है वही व्हाट्सऐप जाएगा — जो घर में है उसे टिक करें।
मुद्रित प्रति: pujasangrah.com — आपका पावन आध्यात्मिक साथी
पूजा के चरण
- 1
पूर्व मुख तैयारी
स्नान करें, स्वच्छ — संभव हो तो पीले या हल्के — वस्त्र पहनें, पूर्व या वेदी की ओर बैठें।
- 2
आवाहन और अर्पण
गणेश से आरंभ करें। विष्णु को जल, चंदन, तुलसी, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। नैवेद्य पर तुलसी रखें।
- 3
जप और आरती
ॐ नमो नारायणाय जपें। समय हो तो विष्णु चालीसा पढ़ें। विष्णु आरती और क्षमा से समाप्त करें।
मंत्र
ॐ नमो नारायणाय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- विष्णु की पूजा गुरुवार को क्यों?
हिंदू वार रीति में गुरुवार विष्णु (और प्रायः बृहस्पति/गुरु) से जुड़ा है। उस दिन तुलसी और नारायण स्मरण रहता है।
- क्या मूर्ति के स्थान पर चित्र चल सकता है?
हाँ — स्वच्छ चित्र या परिवार में शालिग्राम हो तो गृह पूजा हेतु पर्याप्त है।
- गुरुवार को और क्या पढ़ें?
इस साइट पर विष्णु आरती, बृहस्पति आरती और गुरुवार केले के वृक्ष पूजा विधि।
- क्या पूर्ण व्रत आवश्यक है?
सभी के लिए नहीं। परिवार सामर्थ्य देखें — सात्विक आहार और सच्ची पूजा कठोर व्रत से अधिक महत्त्व रखते हैं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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