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मार्च

होली

होलिका की अग्नि और प्रह्लाद का नाम — फिर ब्रज का रंग।

होली उस आग से शुरू होती है जो अत्याचारी की बहन और नारायण कहते बालक को स्मरण कराती है। अगले दिन का रंग आनंद है। दोनों रखें: चेतावनी और क्रीड़ा।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

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इस त्योहार के लिए पाठ

देव चित्र
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प्रह्लाद और होलिका — होली की अग्नि कथा

हिरण्यकशिपु का अहंकार, होलिका का आवरण, और वह बालक जो नारायण कहना नहीं छोड़ा — होलिका दहन के पीछे की कथा।

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भगवान विष्णु अपने प्रतीकों के साथ
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विष्णु आरती

Shri Vishnu Aarti (श्री विष्णु आरती )- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ॐ..॥

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भगवान विष्णु अपने प्रतीकों के साथ
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विष्णु चालीसा

श्री विष्णु चालीसा I Shree Vishnu Chalisa : विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय।।

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कृष्ण मंदिर की मूर्ति
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कृष्ण आरती — आरती कुंजबिहारी की

वृंदावन में भगवान कृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाली प्रिय कुंजबिहारी आरती।

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krishna की मूर्ति
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कृष्ण चालीसा

Shri krishna Chalisa (श्री कृष्णा चालीसा) बंशी शोभित कर मधुर । नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बफल ।

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कृष्ण की मूर्ति
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होली खेल रहे बांकेबिहारी — होली भजन

बांकेबिहारी, राधा और गिरते गुलाल का ब्रज होली गीत — होलिका दहन के बाद और अगली सुबह के रंग तक गाया जाता है।

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