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नवरात्रि रंग 2026 — नौ दिन, देवी और तिथि

शरद नवरात्रि 2026 दिन-दर-दिन: तिथि, वार का रंग, नवदुर्गा स्वरूप, मंत्र और भोग — 11 से 19 अक्टूबर, विजया दशमी 20 अक्टूबर।

अंतिम अद्यतन: 2026-10-07

माँ दुर्गा
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

शरद नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होती है और नौ रात्रियाँ सोमवार, 19 अक्टूबर तक चलती हैं। विजया दशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर है। नीचे की रंग-सूची वह वार-क्रम है जो घटस्थापना रविवार को पड़ने पर व्यापक रूप से अपनाया जाता है — पहला दिन नारंगी, नौवाँ मोरपंख हरा। यह जीवित रीति है, एक शास्त्र नहीं; कुल का दूसरा क्रम हो तो वही रखें। प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात शुरू होती है, इसलिए पहली पूजा की सुबह 11 तारीख है। हब खोलकर आगे पढ़ते रहें: नवरात्रि त्योहार गाइड → · घटस्थापना → · नौ स्वरूप →।

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आरंभ: रविवार, 11 अक्टूबर 2026। नौ रातों का अंत: सोमवार, 19 अक्टूबर। दशहरा: मंगलवार, 20 अक्टूबर। तिथि हर सूर्योदय पर एक देवी नहीं बैठती। व्यापक पंचांग अष्टमी को 18 अक्टूबर की सुबह से 19 अक्टूबर की देर सुबह तक रखते हैं, जब नवमी शुरू होती है; नवमी फिर 20 की दोपहर तक चलती है। संधि पूजा 19 तारीख का वही संगम है। घर फिर भी 11 से 19 तक हर नागरिक दिन एक रंग रखते हैं। पुष्टि करें 19 अक्टूबर → और 20 अक्टूबर → पर। रविवार से पहले सामग्री लिस्ट → जुटा लें। अर्थ: नवदुर्गा →।

11 अक्टूबर — नारंगी — शैलपुत्री

रविवार। पहली रात। घटस्थापना और नंदि पर पर्वतपुत्री। मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। भोग प्रायः शुद्ध घी। पहले यह करें: कलश स्थापना विधि →। संध्या: जय अम्बे गौरी आरती →।

12 अक्टूबर — श्वेत — ब्रह्मचारिणी

सोमवार। माला और कमंडलु वाली तपस्विनी। मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। भोग प्रायः शक्कर। कलश को न हिलाएँ और जौ को हल्का जल दें। संध्या छोटी हो तो दुर्गा चालीसा → पढ़ें।

13 अक्टूबर — लाल — चंद्रघंटा

मंगलवार। घंटे-सा बजता चंद्र — साहस। मंत्र: ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः। भोग प्रायः खीर। कुछ कुल इसे सिंदूर तृतीया कहते हैं और लाल पुष्प के साथ सिंदूर चढ़ाते हैं।

14 अक्टूबर — राजसी नीला — कूष्मांडा

बुधवार। वह मुस्कान जिसमें सृष्टि समाई मानी जाती है — ऊष्मा और प्राण। मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग प्रायः मालपुआ। देर तक न बैठ सकें तो संक्षिप्त दुर्गा मंत्र माला → पर्याप्त है।

15 अक्टूबर — पीला — स्कंदमाता

गुरुवार। स्कंद की माता, गोद में बालक। मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग प्रायः केला। पीला वह रंग भी है जो कई घर बृहस्पति के दिन पहले से पहनते हैं।

16 अक्टूबर — हरा — कात्यायनी

शुक्रवार। कात्यायन की तप से जन्मी योद्धा। मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। भोग प्रायः मधु। कई पूर्वी और उत्तर भारतीय घर इस रात के आसपास सरस्वती आवाहन शुरू करते हैं — देखें सरस्वती पूजा विधि →।

17 अक्टूबर — धूसर — कालरात्रि

शनिवार। अंधेरी करुणा जो भय जलाए — भक्त के हृदय में क्रूरता नहीं। मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। भोग प्रायः गुड़। रीति हो तो काली चालीसा → जोड़ें, और जहाँ इस दिन सप्तमी पूजा हो वहाँ सरस्वती आरती →।

18 अक्टूबर — बैंगनी — महागौरी

रविवार। उजला शांत। मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः। भोग प्रायः नारियल। प्रचलित नौ-दिवसीय पंचांग महागौरी आज रखता है। कुछ पंचांगों में सप्तमी अभी चलती रहती है, इसलिए कन्या पूजन पक्का करने से पहले देख लें: कन्या पूजन विधि →।

19 अक्टूबर — मोरपंख हरा — सिद्धिदात्री

सोमवार। नौवाँ रंग, और कई नगरों में दुर्गा अष्टमी, संधि पूजा और महानवमी एक ही नागरिक दिन। मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः। भोग प्रायः तिल। सुबह के दीप से पहले संधि पूजा → पढ़ें, और कन्या पूजन → गरिमा से रखें।

20 अक्टूबर — विजया दशमी

मंगलवार। यह दसवाँ नवदुर्गा दिन नहीं है। कलश विसर्जन, व्रत का पारण, कई घरों में आयुध पूजा, और उत्तर भारत के बड़े भाग में राम की विजय। विजया दशमी विधि → · राम आरती →।

क्या खाएँ, क्या छोड़ें

सामान्य नवरात्रि भोजन फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा और सेंधा नमक है — प्याज, लहसुन और साधारण अनाज बिना। एक सात्विक भोजन का व्रत भी व्यापक है। गर्भवती, अस्वस्थ, वृद्ध और यात्री निर्जला व्रत न थोपें — खाली पेट से अधिक दीप मायने रखता है। पूरा गृह क्रम नवरात्रि पूजा विधि → में है। रातों के पीछे की कथा के लिए देवी माहात्म्य कथा → के साथ बैठें, और पढ़ सकें तो सप्तशती पाठ →।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि 2026, 10 अक्टूबर को शुरू होती है या 11 को?

प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात शुरू होती है। घटस्थापना और नवरात्रि की पहली सुबह रविवार, 11 अक्टूबर को है। मुहूर्त उस दिन के पंचांग → पर देखें।

2026 में आज नवरात्रि का कौन सा रंग है?

11 नारंगी, 12 श्वेत, 13 लाल, 14 राजसी नीला, 15 पीला, 16 हरा, 17 धूसर, 18 बैंगनी, 19 मोरपंख हरा। कुल की दूसरी सूची गलत नहीं है — अपनी पहनें।

अष्टमी और नवमी एक ही तारीख पर क्यों हैं?

2026 में नवरात्रि के अंत के पास चांद्र दिन नागरिक दिन से छोटा है, इसलिए कई पंचांग दोनों को 19 अक्टूबर पर रखते हैं। नौ-रंग पंचांग फिर भी 18 को महागौरी और 19 को सिद्धिदात्री देता है। संधि पूजा तिथि के संगम पर होती है, रंग-सूची पर नहीं — देखें संधि पूजा विधि →।

दशहरा 2026 कब है?

विजया दशमी मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 है। विसर्जन, पारण और आयुध पूजा के चरण: विजया दशमी पूजा विधि →।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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