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दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी

देवी अम्बे गौरी की स्तुति में क्लासिक दुर्गा आरती, दुष्टों का संहार करने वाली और आशीर्वाद देने वाली दिव्य माता।

देवी दुर्गा की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (दुर्गा, बर्दवान, 2011)

दुर्गा आरती नवरात्रि, अष्टमी-नवमी या दैनिक देवी पूजा के दौरान करें।

देवी दुर्गा की छवि के समक्ष आरती की थाली लेकर खड़े हों। लाल पुष्प अर्पित करें और श्रद्धा से दीप जलाएँ।

आरती के बोल

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी

सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती

चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे

मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा आरती कब सबसे महत्वपूर्ण है?
दुर्गा आरती नवरात्रि के नौ दिनों और विजयदशमी पर विशेष महत्वपूर्ण है।

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