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durga · aarti

दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी

देवी अम्बे गौरी की स्तुति में क्लासिक दुर्गा आरती, दुष्टों का संहार करने वाली और आशीर्वाद देने वाली दिव्य माता।

अंतिम अद्यतन: 2026-10-13

देवी दुर्गा की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (दुर्गा, बर्दवान, 2011)

दुर्गा आरती, जय अम्बे गौरी, का पूरा पाठ नीचे हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखा है। घर इसे शरद नवरात्रि की हर संध्या, अष्टमी-नवमी और रोज की देवी पूजा में गाते हैं। 2026 की नौ रात्रियाँ 11–19 अक्टूबर हैं। पहले कलश रखें: घटस्थापना →। आज की देवी नौ स्वरूप → पर है। आगे दुर्गा चालीसा → और दुर्गा मंत्र जाप →। पूरा क्रम नवरात्रि → पर है।

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देवी दुर्गा की छवि के समक्ष आरती की थाली लेकर खड़े हों। लाल पुष्प अर्पित करें और श्रद्धा से दीप जलाएँ।

आरती के बोल

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को

उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी

सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती

चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे

मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी

आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै

आरती के बाद रात समाप्त नहीं होती। नवदुर्गा → से उस दिन का स्वरूप चढ़ाएँ, या दुर्गा चालीसा → और मंत्र माला → के साथ बैठें। 19 अक्टूबर को संधि पूजा → और कन्या पूजन → रखें। 20 अक्टूबर को विजया दशमी →। स्तोत्र के नामों की कथा — शुम्भ, निशुम्भ, महिष — देवी माहात्म्य कथा → है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा आरती हिंदी में पूरे बोल कहाँ हैं?

इसी पृष्ठ पर, जय अम्बे गौरी से समापन पंक्तियों तक। हिंदी गाया जाने वाला पाठ है। अंग्रेज़ी उसके पास का अर्थ है।

नवरात्रि में दुर्गा आरती कब गाएँ?

हर संध्या दीप, मंत्र, और जो कथा या चालीसा रख रहे हों उसके बाद। 19 अक्टूबर 2026 को यह संधि पूजा भी बंद करती है।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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