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घटस्थापना विधि 2026 — घर पर कलश स्थापना
शरद नवरात्रि 2026 की घटस्थापना, 11 अक्टूबर: जौ, कलश, नारियल, संकल्प, और नौ रात्रियों का दीप।
अंतिम अद्यतन: 2026-10-07
समय: 11 अक्टूबर की सुबह 35–50 मिनट

घटस्थापना — कलश स्थापना — शरद नवरात्रि खोलती है। 2026 में पहली पूजा की सुबह रविवार, 11 अक्टूबर है। प्रतिपदा पिछली रात शुरू होती है, इसलिए अपना पंचांग न कहे तो विधि को 10 तारीख पर न खिसकाएँ। जौ बोएँ, कलश स्थापित करें, माँ का आवाहन करें, और ऐसा दीप जलाएँ जिसे आप सच में संभाल सकें। फिर नौ रात्रियाँ आगे पढ़ें: रंग और दिन सूची → · पूर्ण नवरात्रि विधि → · दुर्गा आरती →।
सामग्री
- स्वच्छ मिट्टी वाला चौड़ा मिट्टी या धातु का पात्र; जौ (जवारा) या गेहूँ के बीज
- कलश, जल, एक सिक्का, आम या अशोक के पत्ते, साबुत नारियल
- लाल वस्त्र और लाल धागा या मौली, यदि कुल में हों
- दुर्गा मूर्ति या चित्र, रोली, अक्षत, लाल पुष्प, धूप, कपूर, घंटी
- घी का दीप जिसे नौ संध्याओं तक सुरक्षित रख सकें
पूजा के चरण
- 1
पिछली रात नहीं, सुबह चुनें
2026 में कलश रविवार, 11 अक्टूबर को स्थानीय प्रातः मुहूर्त में रखें। समय 11 अक्टूबर पंचांग → पर देखें। छूट जाए तो उसी दिन जब संभव हो विधि करें; देर से रखा सच्चा कलश नौ रात छोड़ने से अच्छा है।
- 2
जौ बोएँ
मिट्टी के पात्र में स्वच्छ, हल्की नम मिट्टी भरें। जौ या गेहूँ समान बोकर हल्का ढकें। यह जवारा नौ रात्रियों का बढ़ता साक्षी है। जहाँ थोड़ी हवा हो और दोपहर की कड़ी धूप न पड़े, वहाँ रखें। चम्मच से जल दें, बाढ़ से नहीं।
- 3
कलश भरें और मुकुट दें
कलश में स्वच्छ जल, एक सिक्का, और रीति हो तो थोड़ा अक्षत डालें। मुख पर आम या अशोक पत्र सजाएँ। ऊपर नारियल रखें; कुल में हो तो लाल धागे से बाँधें। कलश को मिट्टी के पात्र पर या उसके पास, दुर्गा चित्र के आगे, पूर्व मुख रखें।
- 4
संकल्प और आवाहन
हाथ धोकर बैठें और अपना नाम, तिथि, और सरल व्रत कहें: नौ रात स्वच्छ दीप और स्वच्छ मन। जल में नदियों का आवाहन जानते हों तो करें, फिर माँ: ॐ दुं दुर्गायै नमः। अधिक जप दुर्गा मंत्र → पर है। लाल पुष्प और रोली चढ़ाएँ।
- 5
दीप जलाएँ, फिर कलश को स्थिर छोड़ें
घी का दीप जलाएँ। अखंड ज्योति तभी पारंपरिक है जब घर में कोई देख रहा हो — आग को वस्त्र के पास न छोड़ें, और सोते या निकलते समय बुझा दें। विजया दशमी तक कलश न हिलाएँ। प्रत्येक संध्या उस दिन का स्वरूप चढ़ाएँ: नौ दिन की सूची →। इस सुबह का समापन दुर्गा आरती → से करें।
कलश मंत्र
ॐ गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु
ॐ दुं दुर्गायै नमः
कलश के बाद साधना रातों की है। पहले दिन का स्वरूप शैलपुत्री है — नवदुर्गा का अर्थ →। शास्त्र पढ़ेंगे तो आज संध्या सप्तशती पाठ → शुरू करें और घर शांत हो तो कथा → सुनें। 19 तारीख को संधि पूजा → और कन्या पूजन →। 20 तारीख को विसर्जन →। हर पृष्ठ का नक्शा नवरात्रि → है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का मुहूर्त क्या है?
यह नगर से बदलता है। रविवार, 11 अक्टूबर की सुबह रखें और स्थानीय तिथि उस दिन के पंचांग → पर पढ़ें। दूसरे नगर की घड़ी न उतारें।
- क्या ताँबे या स्टील का कलश चल जाएगा?
हाँ। मिट्टी पारंपरिक है; फ्लैटों में स्वच्छ धातु का कलश व्यापक है। व्रत शुद्धि और स्थिरता का है, धातु का नहीं।
- यदि जौ न अंकुरे तो?
कलश और दीप रखें। अंकुर बीज और नमी पर निर्भर है। कोंपल देर से आए तो पूजा विफल नहीं होती।
- कलश कब हटाएँ?
विजया दशमी, मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को, या जिस सुबह आपका पंचांग पारण दे। चरण: विजया दशमी पूजा विधि →।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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