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दुर्गा सप्तशती पाठ विधि — घर पर देवी माहात्म्य का पाठ
गृहस्थ हेतु दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) मार्गदर्शिका: तैयारी, अंग, तेरह अध्याय, नवरात्रि अनुसूची और समापन आरती — मंदिर-जैसी व्यवस्था बिना।
अंतिम अद्यतन: 2026-10-13
समय: प्रतिदिन 45–90 मिनट (या शक्ति अनुसार)

दुर्गा सप्तशती — देवी माहात्म्य या चंडी पाठ — मार्कण्डेय पुराण के सात सौ श्लोक हैं। यह पृष्ठ विधि है: वेदी, संकल्प, अंग (कवच, अर्गला, कीलक), और कौन सा अध्याय किस रात। कथा स्वयं, सुनने के लिए पूरी, नवरात्रि कथा दिन 1 → से शुरू होती है और कथा सूची → पर क्रम में है। त्योहार का क्रम नवरात्रि → है।
सामग्री
जो अभी बाकी है वही व्हाट्सऐप जाएगा — जो घर में है उसे टिक करें।
मुद्रित प्रति: pujasangrah.com — आपका पावन आध्यात्मिक साथी
आप क्या पढ़ रहे हैं
सप्तशती तीन चरित्रों में है — प्रथम (मधु-कैटभ), मध्यम (महिषासुर), और उत्तर (शुम्भ-निशुम्भ) — कुल तेरह अध्याय। मुख्य अध्यायों से पहले पारंपरिक पद्धति में रक्षक-पूर्व अंग पढ़े जाते हैं: देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक, प्रायः रात्रि सूक्त आदि के संग। तेरह अध्यायों के बाद क्षमा-प्रार्थना और आरती आती है। पहली रात्रि में सब अंग अनिवार्य नहीं; संकल्प, दीप, और जितना सच्चा पाठ दिन दे — उतने से आरंभ करें। पूर्ण सप्तशती कथा यहाँ पढ़ें →
पूजा के चरण
- 1
शुद्धि और संकल्प
स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें (लाल या हल्के रंग प्रचलित), पूर्व या उत्तर मुख बैठें। दाहिने हाथ में जल लेकर नाम, स्थान और उद्देश्य कहें — परिवार की रक्षा, भय निवृत्ति, बिना क्रूरता की शक्ति — फिर जल छोड़ें।
- 2
वेदी और पुस्तक पूजा
लाल वस्त्र बिछाएँ। माँ की मूर्ति या चित्र और सप्तशती ग्रंथ सम्मान से रखें। दीप-धूप जलाएँ। माँ को — और संक्षेप में ग्रंथ को भी — जल, रोली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें; कई पद्धतियाँ ग्रंथ को देवी का आसन मानती हैं।
- 3
अंग — कवच, अर्गला, कीलक
समय हो तो देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक पढ़ें। ये मन तैयार करते हैं और सात सौ से पहले रखे जाते हैं। समय कम हो तो कम से कम दुर्गा मंत्र माला जपकर उस दिन के अध्याय पर जाएँ।
- 4
उस दिन के अध्याय पढ़ें
निश्चित अनुसूची रखें (नीचे नौ-दिन या सात-दिन)। जहाँ संभव हो स्पष्ट उच्चारण से पढ़ें; ध्यान से सुनना भी पाठ है। माँ के नामों पर जल्दबाजी न करें — ठहरें, फिर आगे बढ़ें।
- 5
नैवेद्य, आरती और क्षमा
फल या सात्विक मिष्ठान्न अर्पित करें। दीप से दुर्गा आरती करें। उच्चारण या मन की त्रुटि हेतु क्षमा माँगें, प्रणाम करें, प्रसाद बाँटें। अखंड ज्योति न रखते हों तो ही दीप बुझाएँ।
तेरह अध्याय — कथा मानचित्र
अध्याय 1 में राजा सुरथ और वैश्य समाधि ऋषि मेधा से मिलते हैं; मधु-कैटभ की कथा सुनते हैं। अध्याय 2–4 में देवों के तेज से माँ का प्रादुर्भाव और महिषासुर-सेना का वध है। अध्याय 5–10 में शुम्भ-निशुम्भ, धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज और अंतिम विजय है। अध्याय 11–13 में माँ की स्तुति, चरित्रों का माहात्म्य और सुरथ-समाधि को वरदान है। पूर्ण अध्याय-दर-अध्याय कथा यहाँ पढ़ें →
नौ-दिन नवरात्रि अनुसूची (गृहस्थ)
जो घर सात सौ एक बैठक में पूरे नहीं कर पाते, वे व्यापक रूप से यह नौ-रात्रि पाठ रखते हैं। कुल भिन्न हैं; बड़े ने जो विभाग सिखाया हो वही रखें। दिन 1, अध्याय 1 — कथा →। दिन 2, अध्याय 2, 3 और 4 — कथा →। दिन 3, अध्याय 5 और 6 — कथा →। दिन 4, अध्याय 7 — कथा →। दिन 5, अध्याय 8 — कथा →। दिन 6, अध्याय 9 और 10 — कथा →। दिन 7, अध्याय 11 — कथा →। दिन 8, अध्याय 12 — कथा →। दिन 9, अध्याय 13 — कथा →। क्षमा स्तोत्र विजया दशमी → की प्रतीक्षा करता है। हर नागरिक दिन की देवी नवदुर्गा → पर है।
सात-दिन अनुसूची (नौ कठिन लगें तो)
पारंपरिक संक्षिप्त योजना: दिन 1 — 1 अध्याय; दिन 2 — 2 अध्याय; दिन 3 — 1 अध्याय; दिन 4 — 4 अध्याय; दिन 5 — 2 अध्याय; दिन 6 — 1 अध्याय; दिन 7 — 2 अध्याय। दिनों में वही दीप और संकल्प रखें। अधूरा होना असफलता नहीं — बिना ग्लानि अगली संध्या जारी करें।
मुख्य मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
ॐ दुं दुर्गायै नमः
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
उन्नत पूर्वविधि पर
कुछ पद्धतियों में कवच से पहले शापोद्धार और उत्कीलन आते हैं। ये विशिष्ट चरण हैं; गृहस्थ इन्हें छोड़ सकते हैं या विश्वसनीय कुल परंपरा/प्रशिक्षित वाचक से सीखें। मंत्रों को व्यक्तियों के विरुद्ध शस्त्र न बनाएँ — माँ का मार्ग धर्म-रक्षा है, हिंसा नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या महिलाएँ घर पर दुर्गा सप्तशती पढ़ सकती हैं?
हाँ। भक्ति में लिंग बाधा नहीं। कुल रीति अनुसार शरीर-मन की शुद्धि रखें और सम्मान से पाठ करें।
- क्या संस्कृत अनिवार्य है, या हिंदी पाठ मान्य है?
संस्कृत पारंपरिक है। संस्कृत कठिन हो तो अर्थ सहित स्पष्ट हिंदी पाठ गृहस्थों में व्यापक रूप से मान्य है — सच्चाई सबसे ऊपर है।
- यह हवन सहित चंडी पाठ से कैसे भिन्न है?
यह पृष्ठ गृह वेदी पर पाठ के लिए है। हवन में अग्नि आहुतियाँ जुड़ती हैं और प्रायः अधिक तैयारी या पुरोहित चाहिए — चंडी पाठ और हवन विधि → देखें।
- नवरात्रि में एक दिन छूट जाए तो?
अगले दिन जहाँ छूटा था वहाँ से जारी करें, या शेष अध्याय शांति से समेटें। ग्लानि में व्रत न छोड़ें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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