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सरस्वती पूजा विधि — वसंत पंचमी और दैनिक विद्या
वाणी और विद्या की देवी की श्वेत-पीत वेदी पूजा: पुस्तकें, वीणा स्मरण, और ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।
अंतिम अद्यतन: 2026-10-07
समय: 25–40 मिनट

सरस्वती विशेषकर माघ शुक्ल पंचमी — वसंत पंचमी — पर पूजी जाती हैं, और जब विद्यार्थी नई पुस्तक आरंभ करता है। शरद नवरात्रि 2026 में कई घर 16–17 अक्टूबर को भी उनका स्मरण करते हैं, कात्यायनी और कालरात्रि के आसपास, अष्टमी से पहले। व्रत मौन अध्ययन का है, कोलाहल का नहीं। नौ रातों की तिथियाँ नवदुर्गा → पर हैं।
सामग्री
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पूजा के चरण
- 1
पुस्तकों को माँ के संग विराजित करें
स्वच्छ श्वेत या पीले वस्त्र पर सरस्वती रखें। चरणों में पुस्तकें और वाद्य रखें। संक्षिप्त गणेश स्मरण से आरंभ करें।
- 2
अर्पण और जप
जल, चंदन, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः जपें। कुछ क्षण मौन रखें — मानो मन ही अर्पण हो।
- 3
आरती और प्रथम अक्षर
सरस्वती आरती करें। बालक उस दिन के प्रथम अक्षर लिख सकते हैं। पूजा के बाद पुस्तकों पर पैर न रखें।
मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या परीक्षा से पहले यह विधि की जा सकती है?
हाँ। एक व्याकुल घंटे से श्रेष्ठ है प्रतिदिन की छोटी बैठक। अध्ययन ही सच्चा उपचार है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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