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नवरात्रि पूजा विधि — घटस्थापना से विजया दशमी तक
2026 हेतु पूर्ण गृह नवरात्रि मार्गदर्शिका: घटस्थापना, नौ नवदुर्गा संध्याएँ, व्रत नियम, कन्या पूजन, सप्तशती पाठ और विसर्जन।
अंतिम अद्यतन: 2026-10-13
समय: नौ संध्याएँ, प्रत्येक 25–45 मिनट (प्रथम दिन प्रातः कलश अतिरिक्त)

यह कलश के बाद की सुबह से विजया दशमी तक की गृह नवरात्रि पूजा है। शरद नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर को खुलती है और मंगलवार, 20 अक्टूबर को बंद होती है। कलश के चरण स्वयं घटस्थापना → पर हैं, जहाँ अधिकतर लोग शुरू करते हैं। हर संध्या उस दिन की देवी नवदुर्गा → पर खोलें और उस दिन के अध्याय कथा → पर। दीप छोड़ने से पहले जय अम्बे गौरी → गाएँ। हर पृष्ठ का नक्शा नवरात्रि → है।
सामग्री
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पूजा के चरण
- 1
घर तैयार करें
पूर्व संध्या पूजा स्थान साफ करें। सात्विक आहार रखें। आरती में फ़ोन दूर। दिखावे नहीं — शांत आमंत्रण से माँ को बुलाएँ।
- 2
घटस्थापना (प्रथम प्रातः)
स्थानीय मुहूर्त में नम मिट्टी में जौ बोएँ। कलश में जल-सिक्का-पत्र भरें; रीति हो तो लाल धागे से नारियल बाँधकर ऊपर रखें। पूर्व मुख दुर्गा मूर्ति के पास स्थापित करें। आवाहन: ॐ दुं दुर्गायै नमः। नौ रात्रियों का साक्षी दीप जलाएँ।
- 3
दैनिक संध्या पूजा
प्रत्येक संध्या: हाथ धोएँ, धूप-दीप जलाएँ, उस दिन के नवदुर्गा स्वरूप को पुष्प और भोग अर्पित करें। दुर्गा चालीसा या संक्षिप्त मंत्र माला पढ़ें। वैकल्पिक: सप्तशती अध्याय — पाठ अनुसूची देखें। दुर्गा आरती गाएँ। प्रसाद बाँटें।
- 4
व्रत (शक्ति अनुसार)
सामान्य विकल्प: फल-दूध व्रत, एक सात्विक भोजन, या केवल प्याज-लहसुन और तामसिक त्याग। जल पिएँ। वृद्ध, गर्भवती, अस्वस्थ या यात्री कठोर व्रत न थोपें — दिखावे पर भक्ति।
- 5
कन्या पूजन (अष्टमी या नवमी)
कन्याओं को (प्रायः नौ, या रीति अनुसार) माँ का जीवंत रूप मानकर आमंत्रित करें। चरण धोएँ, तिलक लगाएँ, सम्मान से पूरी-चना-हलवा करवाएँ, संभव हो तो छोटा उपहार दें। बच्चों को सजावट न बनाएँ — गरिमा से भोजन कराएँ।
- 6
विसर्जन और विजया दशमी
दशमी प्रातः या कुल रीति अनुसार माँ का धन्यवाद करें, कलश जल स्वच्छ पौधे में दें, आरती और क्षमा से समापन करें। कई राम की विजय भी स्मरण करते हैं — नौ रात्रि शक्ति के बाद सामान्य जीवन की कोमल वापसी।
नौ संध्याएँ एक दृष्टि में
1 शैलपुत्री (घी) · 2 ब्रह्मचारिणी (शक्कर) · 3 चंद्रघंटा (खीर) · 4 कूष्मांडा (मालपुआ) · 5 स्कंदमाता (केला) · 6 कात्यायनी (मधु) · 7 कालरात्रि (गुड़) · 8 महागौरी (नारियल) · 9 सिद्धिदात्री (तिल)। पूर्ण अर्थ: नवदुर्गा — नौ स्वरूप →। पाठ रखते हों तो संध्या को सप्तशती अध्यायों से जोड़ें — अनुसूची →। पूर्ण देवी माहात्म्य कथा → सुनें।
संधि पूजा और क्षेत्रीय स्मरण
अष्टमी–नवमी संधि विशेष शक्ति का काल मानी जाती है — कई घर तब लंबा दीप, अधिक पुष्प और शांत जप रखते हैं। बंगाल और पूर्वी भारत में शरद दिनों में सार्वजनिक दुर्गा पूजा (बोधन, महा सप्तमी–नवमी, विसर्जन) भी होती है। पश्चिम में गृह आरती के बाद गरबा-डांडिया रात्रि भरते हैं। पहले कुल पद्धति रखें; यहाँ की विधियाँ कहीं भी सरल गृह वेदी के लिए हैं।
मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या नौ दिन गिनने हेतु घटस्थापना अनिवार्य है?
कलश पारंपरिक आरंभ है। देर से जुड़ें तो उसी संध्या दीप जलाएँ और शेष रात्रियाँ सच्चाई से रखें।
- शरद नवरात्रि 2026 कब है?
कई सूची लगभग 11–19 अक्टूबर 2026, विजया दशमी लगभग 20 अक्टूबर रखती हैं। तिथि नगर से सरकती है — घटस्थापना हेतु अपना पंचांग देखें।
- क्या गरबा और गृह पूजा दोनों रख सकते हैं?
हाँ। पहले वेदी का व्रत रखें; नृत्य उत्सव है — दीप और माँ के नाम का विकल्प नहीं।
- क्या हर घर को पूर्ण सप्तशती पढ़नी चाहिए?
नहीं। कई के लिए चालीसा-आरती पर्याप्त हैं। जो कर सकें, अध्याय जोड़ें — दुर्गा सप्तशती पाठ विधि → देखें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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