durga · puja-vidhi
नवरात्रि पूजा विधि — घटस्थापना और नौ रात्रियाँ
घर पर शरद या चैत्र नवरात्रि: कलश स्थापना, माँ का दैनिक स्वरूप, सरल व्रत, और प्रति संध्या दुर्गा आरती।
समय: नौ संध्याएँ, प्रत्येक 25–40 मिनट

नवरात्रि नौ रात्रियों में शक्ति का आवाहन है। वर्ष में चार नवरात्र आते हैं; चैत्र और शरद मुख्य हैं। प्रत्येक दिन दुर्गा के एक स्वरूप का स्मरण है। व्रत शुद्धि, सात्विक आहार, और उपेक्षा से न बुझने वाले दीप का है।
सामग्री
- कलश, नारियल, आम पत्र, जौ या गेहूँ — जवारा हेतु
- लाल वस्त्र, लाल पुष्प और स्थिर घी दीप
- फल, खीर या सात्विक मिष्ठान्न
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
घटस्थापना
प्रथम प्रातः स्थानीय मुहूर्त में मिट्टी में जौ बोएँ, जल-सिक्का-पत्र सहित कलश रखें, नारियल स्थापित करें। घर में माँ का आवाहन करें।
- 2
दैनिक स्मरण
प्रत्येक संध्या उस दिन के स्वरूप को पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। दुर्गा चालीसा या संक्षिप्त दुर्गा मंत्र पढ़ें। शक्ति अनुसार व्रत रखें — फल, दूध, या एक सात्विक भोजन।
- 3
अष्टमी या नवमी
कई घर कन्या पूजन रखते हैं — नौ कन्याएँ, या रीति अनुसार एक कन्या और बालक। सम्मान से भोजन कराएँ, दिखावे से नहीं।
- 4
विसर्जन
दशमी प्रातः या कुल रीति अनुसार धन्यवाद दें, कलश जल स्वच्छ पौधे में दें, दुर्गा आरती और क्षमा से समापन करें।
मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या नौ दिन गिनने हेतु घटस्थापना अनिवार्य है?
- कलश पारंपरिक आरंभ है। देर से जुड़ें तो उसी संध्या दीप से शुरू करें और शेष रात्रियाँ सच्चाई से पूरी करें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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