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ब्रह्मचारिणी — नवरात्रि दिन 2
ब्रह्मचारिणी नवरात्रि का दूसरा दिन हैं — माला और कमंडलु वाली तपस्विनी। रंग श्वेत, भोग शक्कर। 2026 में यह सोमवार, 12 अक्टूबर है।
अंतिम अद्यतन: 2026-10-13

ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के दिन 2 को पूजी जाती हैं, सोमवार, 12 अक्टूबर 2026। रंग: श्वेत। भोग: शक्कर। मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। रूप: पैदल, जपमाला और कमंडलु लिए। यह स्वरूप पढ़कर उस संध्या की कथा खोलें: दिन 2 की कथा →। पिछला, शैलपुत्री → · अगला, चंद्रघंटा →। नौ रातें क्रम से नवरात्रि का पूरा क्रम → पर हैं।
कथा
ब्रह्मचारिणी विवाह से पहले की पार्वती हैं, जब उन्होंने सुख छोड़कर तप चुना। शिव को पाने के लिए राजभवन छोड़ा, पत्ते खाए, फिर वायु, और एकाग्र स्मरण में खड़ी रहीं। एक हाथ में जपमाला है। दूसरे में कमंडलु — उस विद्यार्थी का जलपात्र जिसके पास लगभग कुछ नहीं।
इस घर-पंचांग में दूसरे दिन का रंग श्वेत है और भोग शक्कर — कठिन व्रत के बाद थोड़ी मिठास, भोज नहीं। मंत्र है ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। लोग पूछते हैं दूसरे दिन क्या चढ़ाएँ: यहाँ शक्कर रखी जाती है।
इस संध्या जो सप्तशती पढ़ी जाती है वह उनका वन-तप नहीं है। वह अध्याय 2, 3 और 4 है — देवों के तेज से माँ का प्रादुर्भाव, महिषासुर का वध, और उसके बाद की स्तुति। स्वरूप वेदी पर पूजा जाता है। वे अध्याय उसके पास सुने जाते हैं।
इस संध्या को कैसे रखें
घटस्थापना → वाला दीप जला रहें। शक्कर चढ़ाएँ, ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः जपें, फिर जय अम्बे गौरी → गाएँ और रखें तो दुर्गा चालीसा →। उस दिन के अध्याय कथा → पर हैं। पूरे पाठ की विधि सप्तशती पाठ → है। नवरात्रि का पूरा क्रम → पर लौटें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- ब्रह्मचारिणी का रंग और भोग क्या है?
इस पंचांग में: श्वेत, और शक्कर। कुल का दूसरा रंग हो तो वही रखें।
- नवरात्रि 2026 में ब्रह्मचारिणी कब हैं?
सोमवार, 12 अक्टूबर 2026, 11 अक्टूबर की घटस्थापना के बाद दिन 2।
- ब्रह्मचारिणी मंत्र क्या है?
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः। स्पष्ट जपें। पूरी माला अनिवार्य नहीं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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