vishnu · puja-vidhi
गुरुवार केले के वृक्ष की पूजा — विष्णु, लक्ष्मी और गुरु
गुरुवार को केले के वृक्ष पर जल और पूजा क्यों होती है, तथा विष्णु, लक्ष्मी और बृहस्पति के सम्मान की सरल विधि।
समय: 20–35 मिनट

गुरुवार विष्णु और गुरु बृहस्पति का दिन है। कई घर केले के वृक्ष को उसी कृपा — और लक्ष्मी की उपस्थिति — का सजीव आसन मानते हैं। विधि कोमल है: जड़ में जल, एक धागा, और हरि का शांत नाम।
सामग्री
- जीवित केले का पौधा, या वृक्ष न हो तो चित्र
- पीला वस्त्र या मौली, केले और थोड़ा कच्चा चावल
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
जड़ स्वच्छ करें
गुरुवार प्रातः स्नान के बाद पौधे के आसपास की घास हटाएँ। सकें तो पूर्व मुख रहें। तने को घायल न करें।
- 2
जल और धागा
जड़ में जल अर्पित करें। रीति हो तो मौली ढीली बाँधें। रोली-अक्षत और पुष्प रखें। विष्णु, लक्ष्मी और गुरु का साथ स्मरण करें।
- 3
जप और भोग
ॐ नमो नारायणाय या गुरु मंत्र जपें। केला अर्पित करें। विवाह में विलंब की प्रार्थना हो तो व्रत कोमल रखें — क्रोध में सौदा न बोलें।
- 4
घर की वेदी पर आरती
घर आकर विष्णु आरती या बृहस्पति आरती करें। केला प्रसाद रूप में बाँटें।
मंत्र
ॐ नमो नारायणाय। ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- केले का वृक्ष पास न हो तो क्या व्रत छूटता है?
- गुरुवार को घर की वेदी पर विष्णु और गुरु की पूजा करें। वृक्ष का चित्र पर्याप्त है। जबरन रोपण से अधिक जीवित पौधों के प्रति कोमलता मायने रखती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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