lakshmi · aarti
लक्ष्मी आरती — ॐ जय लक्ष्मी माता
माता लक्ष्मी की स्तुति में गाई जाने वाली प्रिय आरती, धन, समृद्धि और शुभ आशीर्वाद की दाता।
अंतिम अद्यतन: 2026-07-26

लक्ष्मी आरती शुक्रवार, दीपावली या दैनिक पूजा के बाद करें। दीप जलाकर श्रद्धा से पुष्प अर्पित करें।
माता लक्ष्मी की छवि के समक्ष आरती की थाली लेकर खड़े हों। प्रत्येक छंद को श्रद्धा से गाएँ और दीप को वृत्ताकार घुमाएँ।
आरती के बोल
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- लक्ष्मी आरती परंपरागत रूप से कब की जाती है?
लक्ष्मी आरती सामान्यतः शुक्रवार, दीपावली और अनेक घरों में संध्या पूजा के बाद की जाती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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