brihaspati · aarti
बृहस्पति (गुरुवार) आरती
बृहस्पति (गुरुवार) आरती — गुरुवार को देवगुरु बृहस्पति की हिंदी आरती; ज्ञान और गुरुवार से जुड़ी पूजा।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-18

गुरुवार बृहस्पति का दिन है — देवगुरु, देवताओं के शिक्षक, और ज्योतिष में गुरु ग्रह जो ज्ञान, धर्म और विद्या से जुड़ा माना जाता है। प्रातः या सायंस गुरुवार पूजा के बाद यह आरती गाएँ; प्रायः पीले पुष्प, केला या चने का भोग और घी दीप के साथ। कई घर इसे विष्णु स्मरण या केले के वृक्ष की गुरुवार रीति से जोड़ते हैं। लाभ को स्पष्टता और स्थिर आजीविका की पारंपरिक आशा समझें — गारंटी नहीं।
वेदी की ओर रहें, गाते हुए दीप घुमाएँ, अंत में प्रसाद बाँटें। विद्यार्थी और शिक्षक प्रायः अध्ययन व मार्गदर्शन हेतु गुरुवार स्मरण रखते हैं।
आरती के बोल
जय बृहस्पति देवा,ऊँ जय बृहस्पति देवा ।छिन छिन भोग लगा‌ऊँ,कदली फल मेवा ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥
बृहस्पति देव की आरती
तुम पूरण परमात्मा,तुम अन्तर्यामी ।जगतपिता जगदीश्वर,तुम सबके स्वामी ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥चरणामृत निज निर्मल,सब पातक हर्ता ।सकल मनोरथ दायक,कृपा करो भर्ता ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥तन, मन, धन अर्पण कर,जो जन शरण पड़े ।प्रभु प्रकट तब होकर,आकर द्घार खड़े ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥दीनदयाल दयानिधि,भक्तन हितकारी ।पाप दोष सब हर्ता,भव बंधन हारी ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥सकल मनोरथ दायक,सब संशय हारो ।विषय विकार मिटा‌ओ,संतन सुखकारी ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥जो को‌ई आरती तेरी,प्रेम सहित गावे ।जेठानन्द आनन्दकर,सो निश्चय पावे ॥ऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा ॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- बृहस्पति आरती कब गाएँ?
गुरुवार प्रातः या सायंस पूजा में, और गुरुवार व्रत हो तो उसके समापन पर।
- क्या यही गुरुवार आरती है?
हाँ — खोज में thursday aarti / गुरुवार आरती प्रायः बृहस्पति देव आरती के लिए आती है।
- गुरुवार को इस साइट पर और क्या पढ़ें?
गुरुवार केले के वृक्ष पूजा विधि, विष्णु आरती और गुरु मंत्र।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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