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अगस्त–सितंबर

कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण का अर्धरात्रि जन्म — पालना, पंचामृत, और निशीत की प्रतीक्षा करता दीप।

जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी रोहिणी पर कृष्ण जन्म का पर्व है। घर पालना, हल्का व्रत और अर्धरात्रि आरती रखते हैं।

आनंद क्रीड़ामय हो; मन स्थिर रहे। मक्खन, तुलसी और कृष्ण आरती रात्रि पूरी करते हैं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…
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इस त्योहार के लिए पाठ

पूजा वेदी का चित्र
krishnapuja-vidhi

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि — अर्धरात्रि गृह पूजा

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की विधि: दिन भर स्मरण, बाल गोपाल का पंचामृत अभिषेक, और निशीत काल में अर्धरात्रि आरती।

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कृष्ण मंदिर की मूर्ति
krishnaaarti

कृष्ण आरती — आरती कुंजबिहारी की

वृंदावन में भगवान कृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाली प्रिय कुंजबिहारी आरती।

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krishna की मूर्ति
krishnachalisa

कृष्ण चालीसा

Shri krishna Chalisa (श्री कृष्णा चालीसा) बंशी शोभित कर मधुर । नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बफल ।

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krishna की मूर्ति
krishnamantra

कृष्ण मंत्र

Krishna Mantra: ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।

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पूजा वेदी का चित्र
krishnapuja-vidhi

भगवद्गीता पाठ विधि — घर पर कैसे पढ़ें

शांत गीता बैठक के नियम: लकड़ी की चौकी, पूरे अध्याय, व्यर्थ बात नहीं, और अंतिम श्लोक के बाद आरती।

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भगवान विष्णु अपने प्रतीकों के साथ
vishnuaarti

विष्णु आरती

Shri Vishnu Aarti (श्री विष्णु आरती )- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ॐ..॥

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कृष्ण की मूर्ति
krishnabhajan

नंदभवन में उड़ रही धूल — ब्रज रज भजन

ब्रज गीत जो नंद भवन की धूल को तीन लोक के तीर्थों से अधिक प्रिय मानता है — जन्माष्टमी और संध्या कीर्तन में गाया जाता है।

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कृष्ण की मूर्ति
krishnabhajan

दर्शन दो घनश्याम नाथ — विरह भजन

प्रार्थना-भजन जो घनश्याम से मुखदर्शन और हृदय-दीप माँगता है — संध्या कीर्तन और जन्माष्टमी पर गाया जाता है।

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कृष्ण की मूर्ति
krishnabhajan

जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल — श्रीनाथजी भजन

पुष्टिमार्ग कीर्तन जो वल्लभ, विट्ठल, यमुना और श्रीनाथजी का जयघोष करता है — दर्शन और जन्माष्टमी सभा में गाया जाता है।

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कृष्ण की मूर्ति
krishnabhajan

गोविन्द जय-जय, गोपाल जय-जय — नाम कीर्तन

क्लासिक नाम-कीर्तन जो गोविन्द, गोपाल और देव-परिवार का जयघोष करता है — नित्य और जन्माष्टमी पर गाया जाता है।

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