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कृष्ण आरती — आरती कुंजबिहारी की
वृंदावन में भगवान कृष्ण के दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाली प्रिय कुंजबिहारी आरती।
अंतिम अद्यतन: 2026-07-26

कृष्ण आरती जन्माष्टमी, दैनिक संध्या पूजा या घर में कृष्ण पूजा के दौरान करें।
कृष्ण की छवि के समक्ष आरती की थाली लेकर खड़े हों। धीरे-धीरे गाएँ, प्रत्येक छंद में भगवान की दिव्य सुंदरता का आनंद लें।
आरती के बोल
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक
ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग
अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच
चरन छवि श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद
टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- कृष्ण आरती सबसे अधिक कब की जाती है?
कृष्ण आरती मंदिरों में प्रतिदिन मंगला और संध्या काल में, और विशेषकर जन्माष्टमी पर की जाती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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