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श्री राम चालीसा

राम चालीसा — स्तुति के चालीस हिंदी छंद। कब पाठ करें और भक्त से क्या अपेक्षा — संदर्भ सहित।

अंतिम अद्यतन: 2026-09-18

ram की मूर्ति
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

यह चालीसा चालीस छंदों में राम की स्तुति है। दीप जलाकर राम नवमी और मंगलवार पर, या जब घर इस देव स्मरण रखे, स्थिर ध्यान से पाठ करें। मार्ग स्तुति और समर्पण का है — भौतिक फल का सौदा नहीं। नीचे छंद भक्ति से पढ़ें; अर्थ बार-बार श्रवण से गहरा हो।

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यदि राम की वेदी हो तो उसके समक्ष बैठें। संक्षिप्त संकल्प लें, शीघ्रता बिना पाठ करें, और रीति हो तो मौन या आरती से समापन करें।

चालीसा के छंद

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

श्री राम चालीसा

दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥२॥

तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

तुम अनाथ के नाथ गुंसाई। दीनन के हो सदा सहाई॥३॥

ब्रह्मादिक तव पारन पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

चारिउ वेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखीं॥४॥

गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहीं॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहिं होई॥५॥

राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥६॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥

फूल समान रहत सो भारा। पाव न कोऊ तुम्हरो पारा॥७॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहुं न रण में हारो॥

नाम शक्षुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥८॥

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥

ताते रण जीते नहिं कोई। युद्घ जुरे यमहूं किन होई॥९॥

महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥

सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥१०॥

घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥

सो तुमरे नित पांव पलोटत। नवो निद्घि चरणन में लोटत॥११॥

सिद्घि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥१२॥

इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥

जो तुम्हे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥१३॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा। नर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥१४॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं॥१५॥

सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥१६॥

जो कुछ हो सो तुम ही राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

राम आत्मा पोषण हारे। जय जय दशरथ राज दुलारे॥१७॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥१८॥

सत्य शुद्घ देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन मन धन॥१९॥

याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिर मेरा॥२०॥

और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई॥

साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्घता पावै॥

अन्त समय रघुबरपुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥२२॥

श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥२3॥

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।

हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।

जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्घ हो जाय॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम चालीसा कब पढ़ें?

राम नवमी और मंगलवार पर, और राम से जुड़े पर्वों में। कई भक्त नित्य पाठ भी रखते हैं।

क्या विशेष भोग आवश्यक है?

स्वच्छ स्थान और सच्चा स्वर पर्याप्त है। पुष्प, धूप और सात्विक प्रसाद परिवार रीति अनुसार।

क्या नवसाधक धीरे पाठ कर सकते हैं?

हाँ — गति से अधिक स्पष्टता और श्रद्धा। एक बार ध्यान से चालीसा पूरी करें।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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