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ram · bhajan

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो — मीराबाई भजन

मीराबाई का भजन उस राम-रत्न धन पर जो खर्च नहीं होता, चोर नहीं लूटता — राम नवमी और संध्या मीरा कीर्तन में गाया जाता है।

अंतिम अद्यतन: 2026-09-14

राम की मूर्ति

कोमल गाएँ। टेक ही धन है; पदों को ऊँची आवाज़ की आवश्यकता नहीं।

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मीरा नाम को सत्गुरु दिया रत्न कहती हैं। राम आरती के बाद टेक दो बार, फिर नाव और गिरिधर वाले पद। बैठक ब्रज की ओर मुड़े तो कृष्ण आरती बाद में हो सकती है।

भजन के बोल

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु, कृपा कर अपनायो

जन्म जन्म की पूंजी पाई, जग में सबी खुमायो

खर्च ना खूटे, चोर ना लूटे, दिन दिन बढ़त सवायो

सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तरवयो

मीरा के प्रभु गिरिधर नगर, हर्ष हर्ष जस गायो

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह राम भजन है या कृष्ण भजन?

मीरा राम-रत्न और गिरिधर एक ही श्वास में लेती हैं। राम नवमी पाठ के साथ रखें; कृष्ण आरती स्वाभाविक पड़ोसी है।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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