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krishna · bhajan

होली खेल रहे बांकेबिहारी — होली भजन

बांकेबिहारी, राधा और गिरते गुलाल का ब्रज होली गीत — होलिका दहन के बाद और अगली सुबह के रंग तक गाया जाता है।

अंतिम अद्यतन: 2026-09-14

कृष्ण की मूर्ति

आग ठंडी होने के बाद आँगन में गाएँ। ताल क्रीड़ामय रहे; रंग से पहले होलिका कथा के लिए स्थान छोड़ें।

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होली के दो स्वभाव हैं: आग की चेतावनी और ब्रज की क्रीड़ा। प्रह्लाद कथा के बाद यह भजन रंग खोलता है। आँगन शांत हो तो कृष्ण आरती बैठक बंद करे।

भजन के बोल

होली खेल रहे बांकेबिहारी आज रंग बरस रहा, और झूम रही दुनिया सारी

अबीर गुलाल के बादल छा रहे है, होरी है होरी है छोर मचा रहे

झोली भर के गुलाल कि मारी, आज रंग बरस रहा

देख देख सखियन के मन हर्षा रहे, मेरे बांके बिहारी आज प्रेम बरसा रहे

उनके संग में हैं राधा प्यारी, आज रंग बरस रहा

आज नंदलाला ने धूम मचाई है, प्रेम भरी होली कि झलक दिखायी है

रंग भर भर के मारी पिचकारी, आज रंग बरस रहा

अबीर गुलाल और ठसो का रंग है, वृंदावन बरसानो झूम रह्यो संग है

मैं बार बार जाऊं बलिहारी

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह भजन होलिका कथा की जगह ले सकता है?

नहीं। पहले प्रह्लाद कथा सुनें, फिर गाएँ। आग नाम माँगती है; रंग आनंद।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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