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जितिया आरती — ॐ जय कश्यप नन्दन (जीमूतवाहन पूजा)

जीवित्पुत्रिका (जितिया) संध्या पूजा में व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरती — ॐ जय कश्यप नन्दन — व्रत रखने वाली माताओं हेतु बोल।

अंतिम अद्यतन: 2026-09-21

जितिया आरती हेतु सूर्य
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

आश्विन कृष्ण अष्टमी पर जीमूतवाहन पूजा और कथा के बाद माताएँ यह स्तुति गाती हैं। संबोधन सूर्य को कश्यप-नन्दन और अदिति-नन्दन के रूप में है — संतान की दीर्घायु हेतु आह्वान किया प्रकाश। ये ही पद सूर्य आरती में भी हैं; यहाँ जितिया प्रदोषकाल पूजा के संदर्भ में।

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जीमूतवाहन के समक्ष घी दीप जलाएँ। कथा के बाद आरती थाली धीरे वृत्ताकार घुमाते गाएँ। टाइम्स नाउ, टीवी9 और अन्य प्रकाशित गाइड इन्हीं पदों को आवश्यक जितिया आरती बताते हैं।

आरती के बोल

ॐ जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।

त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥

ॐ जय कश्यप नन्दन…

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।

दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥

ॐ जय कश्यप नन्दन…

सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।

अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥

ॐ जय कश्यप नन्दन…

सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।

विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥

ॐ जय कश्यप नन्दन…

कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।

सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥

ॐ जय कश्यप नन्दन…

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।

वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥

ॐ जय कश्यप नन्दन…

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।

हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥

ॐ जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।

इस आरती के संग प्रचलित मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जितिया आरती सूर्य आरती से भिन्न है?

प्रकाशित बोल वही ॐ जय कश्यप नन्दन स्तुति हैं। जितिया पर इसे जीमूतवाहन पूजा-कथा के बाद प्रदोषकाल में गाते हैं; दैनिक सूर्य आरती में प्रातः भी।

आरती कब गाएँ?

व्रत की संध्या पूजा और कथा के बाद — प्रदोषकाल पारंपरिक है। कुछ पारण प्रातः सूर्य अर्घ्य के संग भी गाते हैं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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