मुख्य सामग्री पर जाएँ

surya · chalisa

सूर्य चालीसा

सूर्य चालीसा — स्तुति के चालीस हिंदी छंद। कब पाठ करें और भक्त से क्या अपेक्षा — संदर्भ सहित।

अंतिम अद्यतन: 2026-09-18

सूर्य देव, सूर्य देवता
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (सूर्य, उत्तर भारत)

यह चालीसा चालीस छंदों में सूर्य की स्तुति है। दीप जलाकर रविवार और प्रातः पर, या जब घर इस देव स्मरण रखे, स्थिर ध्यान से पाठ करें। मार्ग स्तुति और समर्पण का है — भौतिक फल का सौदा नहीं। नीचे छंद भक्ति से पढ़ें; अर्थ बार-बार श्रवण से गहरा हो।

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

यदि सूर्य की वेदी हो तो उसके समक्ष बैठें। संक्षिप्त संकल्प लें, शीघ्रता बिना पाठ करें, और रीति हो तो मौन या आरती से समापन करें।

चालीसा के छंद

कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग,

पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥

जय सविता जय जयति दिवाकर!, सहस्त्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥

भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!, सविता हंस! सुनूर विभाकर॥ १॥

विवस्वान! आदित्य! विकर्तन, मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥

अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥ २॥

सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥

अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥३॥

मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी॥

उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते॥४॥

मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥

पूषा रवि आदित्य नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥५॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं, मस्तक बारह बार नवावैं॥

चार पदारथ जन सो पावै, दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥६॥

नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर को कृपासार यह॥

सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥७॥

बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते॥

उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥८॥

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबल मोह को फंद कटतु है॥

अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥९॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥

भानु नासिका वासकरहुनित, भास्कर करत सदा मुखको हित॥१०॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥११॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥

युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥१२॥

बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटिमंह, रहत मन मुदभर॥

जंघा गोपति सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥१३॥

विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी॥

सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे॥१४॥

अस जोजन अपने मन माहीं, भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥

दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै॥१५॥

अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता॥

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥

मंद सदृश सुत जग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके॥१६॥

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा॥

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥१७॥

परम धन्य सों नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥१८॥

भानु उदय बैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥

यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता॥१९॥

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥२०॥

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य,

सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य चालीसा कब पढ़ें?

रविवार और प्रातः पर, और सूर्य से जुड़े पर्वों में। कई भक्त नित्य पाठ भी रखते हैं।

क्या विशेष भोग आवश्यक है?

स्वच्छ स्थान और सच्चा स्वर पर्याप्त है। पुष्प, धूप और सात्विक प्रसाद परिवार रीति अनुसार।

क्या नवसाधक धीरे पाठ कर सकते हैं?

हाँ — गति से अधिक स्पष्टता और श्रद्धा। एक बार ध्यान से चालीसा पूरी करें।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

संबंधित लेख

पूजा वेदी का चित्र
surya•puja-vidhi

छठ पूजा विधि 2026 — 13 से 16 नवंबर

छठ पूजा 2026 की चार दिवसीय विधि: नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14, संध्या अर्घ्य 15, उषा अर्घ्य 16 — बिहार और पूर्व।

और पढ़ें
सूर्य देव, सूर्य देवता
surya•aarti

सूर्य आरती

Surya dev aarti lyrics in hindi: सूर्य देव की आरती। जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन ॥

और पढ़ें
सूर्य देव, सूर्य देवता
surya•mantra

सूर्य मंत्र

सूर्य मंत्र — सूर्य के जप व गृह स्मरण हेतु हिंदी पाठ, कब जपें मार्गदर्शन सहित।

और पढ़ें
सूर्य की वेदी
surya•puja-vidhi

छठ पूजा सामग्री लिस्ट हिंदी में

13–16 नवंबर 2026 की छठ पूजा सामग्री हिंदी और अंग्रेज़ी में: बाँस का सूप, ठेकुआ, गन्ना, फल, और अर्घ्य का जल।

और पढ़ें
जितिया आरती हेतु सूर्य
surya•aarti

जितिया आरती — ॐ जय कश्यप नन्दन (जीमूतवाहन पूजा)

जीवित्पुत्रिका (जितिया) संध्या पूजा में व्यापक रूप से गाई जाने वाली आरती — ॐ जय कश्यप नन्दन — व्रत रखने वाली माताओं हेतु बोल।

और पढ़ें
जितिया पारण अर्घ्य हेतु सूर्य वेदी
surya•puja-vidhi

जितिया पूजा विधि — जीवित्पुत्रिका व्रत (नहाय-खाय से पारण)

आश्विन कृष्ण अष्टमी का तीन दिवसीय जितिया (जीवित्पुत्रिका) गाइड: नहाय-खाय, निर्जला खुर जितिया, जीमूतवाहन संध्या पूजा और सूर्योदय पारण।

और पढ़ें
जितिया कथा हेतु पूजा वेदी
surya•stories

जितिया व्रत कथा — जीमूतवाहन, चील और सियारिन

जीवित्पुत्रिका की दो आवश्यक कथाएँ: नागों हेतु राजा जीमूतवाहन का बलिदान, और सत्य व्रत की चील–सियारिन कथा।

और पढ़ें