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संतोषी माता शुक्रवार कथा — बहू के सोलह शुक्रवार
प्रचलित शुक्रवार व्रत-कथा: गुड़-चना, उपेक्षित बहू, और वह संतोष जो खट्टी वाणी बिना पति लौटाता है।

संतोषी पर्याप्तता की देवी हैं। यह कथा घी दीप और गुड़-चने के कटोरे के संग सुनते हैं — और खट्टेपन की चेतावनी के संग।
उपेक्षित बहू ने वृद्धा से शुक्रवार व्रत सीखा: शक्ति अनुसार निराहार, गुड़ और भुना चना, संतोषी कथा, खट्टा अन्न और खट्टी वाणी दूर। सोलह शुक्रवार बैठी। घर का भाग्य मुड़ा — काम लौटा, भूख शिथिल हुई।
फिर अहंकार ने व्रत ठोकर मारी। भोज हुआ; किसी ने खट्टा परोसा; पति संकट में पड़ा। बहू ने क्षमा माँगी, शुक्रवार फिर रखे, सिक्के दिखाए बिना बच्चों को फल खिलाए। संतोषी, सुधरे संतोष से प्रसन्न, घर लौटाया। कथा का नियम सरल: पर्याप्तता की माँ तब जाती हैं जब मुख कड़वा हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- कितने शुक्रवार पारंपरिक हैं?
- सोलह प्रचलित संख्या है। कोई नामित इच्छा तक रखता है — क्रोध में बोले सौदे के बिना।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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