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आमलकी एकादशी कथा — आँवला वृक्ष और विष्णु
फाल्गुन शुक्ल एकादशी: आँवला विष्णु के संग क्यों पूजा जाता है, और तुलसी से व्रत कैसे पूरा होता है।

वृक्ष खड़ी शुद्धि है। यह कथा उसी नाम की गृह विधि के संग है।
फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर विष्णु आँवला के संग पूजे जाते हैं — आयुर्वेद स्मृति में स्वच्छ ताप और दीर्घायु का फल, गृह वाटिका का तीर्थ। कथा कहती है वृक्ष में प्रभु की उपस्थिति है; इसलिए छाल खेल में न घायल हो।
राजा या ब्राह्मण — नाम बदलते — व्रत रखकर आँवला-तुलसी अर्पित करते, रोग या सूखा शिथिल होता। चमत्कार गौण है। मुख्य दान वह दिन है जब देह और वृक्ष एक शिष्टता से देखे जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आँवला वृक्ष न हो तो क्या कथा व्यर्थ है?
- चाहें तो बाजार का फल अर्पित करें और विष्णु एकादशी रखें। कथा जीवित पौधों के प्रति शिष्टता अभी भी सिखाती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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