मुख्य सामग्री पर जाएँ

parvati · stories

करवा चौथ व्रत कथा — वीरावती और मिथ्या चंद्र

करवा चौथ पर वीरावती की गृह कथा: सात भाई, छलनी के पीछे मिथ्या चंद्र, और कथा में सच्चा चंद्रोदय जो पति को लौटाता है।

अंतिम अद्यतन: 2026-10-22

देव चित्र
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी — गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 — की संध्या बैठक में चंद्रोदय अर्घ्य से पहले यह कथा सुनी जाती है। यह वीरावती की गृह कथा है। दिन का क्रम पूजा विधि → में है; तिथि और नगर का चंद्रोदय करवा चौथ हब → पर हैं।

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

वीरावती के सात भाई थे। वह उनकी वह बहन थी जिसकी कमी वे नहीं देख सकते थे। वह विवाहित थी और मायके आई हुई थी। करवा चौथ को उसने उषा से निर्जला व्रत लिया, जैसा उस घर की रीति थी, और दिन जल के बिना लंबा होता गया।

छलनी के पीछे मिथ्या चंद्र

संध्या खिंचती गई, और चंद्र नहीं उगा। भाइयों का स्नेह व्रत से आगे निकल गया। उन्होंने दीप जलाया, उसके आगे छलनी रखी, और कहा कि चंद्र आ गया। वीरावती ने उनके मुख पर भरोसा किया। उस प्रकाश को अर्घ्य देकर उसने ग्रास लिया।

पहले ग्रास में बाल था। दूसरे में कंकड़। तभी ससुराल से संदेश आया: पति बहुत रुग्ण हो गया है। मिथ्या चंद्र को अर्घ्य दिया जा चुका था, और व्रत टूट चुका था।

मार्ग

माता ने उसे पति के घर की ओर विदा किया। एक ही बात कही: मार्ग में जहाँ सौभाग्य का चिह्न मिले, वहीं प्रणाम करना। वीरावती चली। उसने एक वृद्धा का सम्मान किया और उसका आशीर्वाद लिया। रास्ता शांत था। यही उस व्रत का भार था जो समय से पहले बंद हो गया था।

गौरी की सीख

मार्ग के अंत में उसने गौरी को प्रणाम किया। देवी ने भूल साफ कही: मिथ्या चंद्र से व्रत टूटा, क्योंकि स्नेह ने जल्दी करा दी। गौरी की सीख थी — अगली चतुर्थी बिना उतावलेपन के रखना, और तब तक प्रतीक्षा करना जब तक चंद्र स्वयं न उग आए। व्रत सत्य में पूरा होना था।

सच्चा चंद्रोदय

वीरावती ने वह अगली चतुर्थी उषा से निर्जला रखी। कोई उधार की रोशनी नहीं थी। जब चंद्र सचमुच उगा, उसने छलनी से जल अर्पित किया और पति को देखा। कथा में रोग हटता है और पति लौटता है। भाई रोए। घर ने कथा का अर्थ समझा: जो प्रेम व्रत को बीच में काट दे, वह घाव छोड़ता है; वही प्रेम सच्चे चंद्र की प्रतीक्षा करे, तो कथा इसी को पति की वापसी कहती है।

यह कथा व्रत पूरा करने की है। यह वचन नहीं कि कोई रोग मिट जाएगा, और यह चिकित्सक का स्थान नहीं लेती।

दूसरी कथा — करवा और मगरमच्छ

एक और प्रचलित कथा तुंगभद्रा के तट की है। उसमें करवा नाम की पत्नी पति को मगरमच्छ के शिकंजे में पाती है, कच्चे धागे से उसे बाँधती है, और अपने सत्य पर खड़ी रहती है जब तक वह छूट न जाए। कुछ घर मिट्टी के करवे का नाम इसी से जोड़ते हैं। वह कथा अपनी जगह खड़ी है। वह वीरावती की रात नहीं, और उसमें सात भाइयों तथा छलनी का कथानक नहीं। एक सुनें या दोनों, उन्हें अलग रखें।

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 की संध्या बैठक में, चंद्रोदय अर्घ्य से पहले, वीरावती सुनें। सरगी, गौरी पूजा, अर्घ्य और पारण करवा चौथ विधि → में हैं। उत्सव पृष्ठ करवा चौथ → है।

व्हाट्सऐपटेलीग्राम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पारण से पहले कथा सुनना आवश्यक है?

पारंपरिक क्रम है: कथा, फिर चंद्र अर्घ्य, फिर पारण। संक्षिप्त श्रवण पर्याप्त है। चंद्र उगने के बाद शरीर साथ न दे तो अर्घ्य देकर पारण करें; कथा का शेष पहले जल के पास पूरा हो सकता है।

यदि अकेले हों तो?

दीप जलाकर यह पृष्ठ पढ़ें। भीड़ आवश्यक नहीं। एक बार सुनना, फिर चंद्र उदय पर अर्घ्य — यही विधि पूरी होती है। आसपास के चरण पूजा विधि → में हैं।

क्या मगरमच्छ वाली कथा यही कथा है?

नहीं। तुंगभद्रा का मगरमच्छ दूसरी प्रचलित कथा है — करवा नाम की पत्नी और कच्चा धागा। वीरावती की कथा यही पृष्ठ है: सात भाई, और छलनी के पीछे मिथ्या चंद्र।

2026 में यह कथा कब सुनें?

करवा चौथ पर, गुरुवार 29 अक्टूबर 2026, संध्या बैठक में, चंद्रोदय अर्घ्य से पहले। दिन के चरण पूजा विधि → में हैं। उत्सव पृष्ठ करवा चौथ → है।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

संबंधित लेख

करवा चौथ आरती हेतु पार्वती
parvati•aarti

करवा चौथ आरती — जय पार्वती माता

करवा चौथ की संध्या पूजा में गाई जाने वाली आरती — जय पार्वती माता — थाली सजने के बाद, चंद्रोदय अर्घ्य से पहले।

और पढ़ें
पार्वती की वेदी
parvati•puja-vidhi

करवा चौथ की सामग्री लिस्ट हिंदी में

29 अक्टूबर 2026 की करवा चौथ सामग्री हिंदी और अंग्रेज़ी में: मिट्टी का करवा, छलनी, दीप, रोली, और संध्या की थाली।

और पढ़ें
पार्वती की वेदी
parvati•puja-vidhi

करवा चौथ सरगी टाइम 2026 — सूर्योदय से पहले क्या खाएँ

गुरुवार 29 अक्टूबर 2026 की सरगी: वरिष्ठ जो थाली सूर्योदय से पहले अलग रखें, फिर स्वास्थ्य हो तो चंद्रोदय तक निर्जला दिन।

और पढ़ें
पूजा वेदी का चित्र
parvati•puja-vidhi

करवा चौथ पूजा विधि — चंद्रोदय तक निर्जला व्रत

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार 29 अक्टूबर 2026: सरगी, स्वास्थ्य हो तो निर्जला दिन, गौरी पूजा, व्रत कथा, और पारण से पहले चंद्र अर्घ्य।

और पढ़ें
देव चित्र
parvati•stories

वट सावित्री व्रत कथा — सावित्री और सत्यवान

स्कन्द पुराण की सावित्री कथा, जिन्होंने यम के पीछे चलकर सत्यवान का जीवन लौटाया — अखंड सौभाग्य हेतु वट-वृक्ष व्रत की कथा।

और पढ़ें
देवी पार्वती गणेश और शिव के साथ
parvati•aarti

पार्वती आरती

Parvati Aarti (पार्वती आरती)- जय पार्वती माता ,जय पार्वती माता । ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता ॥ॐ..॥

और पढ़ें
देवी पार्वती गणेश और शिव के साथ
parvati•chalisa

पार्वती चालीसा

पार्वती चालीसा — स्तुति के चालीस हिंदी छंद। कब पाठ करें और भक्त से क्या अपेक्षा — संदर्भ सहित।

और पढ़ें