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करवा चौथ पूजा विधि — चंद्रोदय तक निर्जला व्रत
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार 29 अक्टूबर 2026: सरगी, स्वास्थ्य हो तो निर्जला दिन, गौरी पूजा, व्रत कथा, और पारण से पहले चंद्र अर्घ्य।
अंतिम अद्यतन: 2026-10-22
समय: उषा से चंद्रोदय तक का व्रत

करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को है — गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026। जो व्रत रखें वे उषा से सच्चे चंद्रोदय के अर्घ्य तक निर्जला रहती हैं; स्वास्थ्य पहले है, और चिकित्सक का वचन व्रत की सीमा है। सूर्योदय से पहले की थाली सरगी → है। थाली की सूची सामग्री → है। नगर का चंद्रोदय 29 अक्टूबर पंचांग → पर है। अर्घ्य से पहले व्रत कथा → सुनें, और जय पार्वती माता → गाएँ।
सामग्री
जो अभी बाकी है वही व्हाट्सऐप जाएगा — जो घर में है उसे टिक करें।
मुद्रित प्रति: pujasangrah.com — आपका पावन आध्यात्मिक साथी
पात्र
संध्या की बैठक में मिट्टी का करवा, छलनी, पीतल या मिट्टी का कलश, पूजा थाली और घी का दीप चाहिए। ये घर में पहले से रखी वस्तुएँ हैं। उन्हें धो लें। खरीदी हुई टोकरी व्रत का अंग नहीं है।
शृंगार
रोली, सिंदूर, मेहंदी और चूड़ियाँ वही रहें जो कुल सौभाग्य पर पहले से पहनता है। मिट्टी की गौर न हो तो गौरी–पार्वती का छपा चित्र पर्याप्त है। जैसे घर सजे, वैसे सजें; थाली नए गहने नहीं माँगती।
नैवेद्य
सरगी, जब कोई वरिष्ठ भेजे, सूर्योदय से पहले खाई जाती है। संध्या को थाली में फल, एक मिष्ठान्न, और अर्घ्य का स्वच्छ जल रहता है। पारण का पहला घूँट अलग रख दें, ताकि चंद्र उगने पर हाथ न ढूँढे।
चरण-दर-चरण विधि
- 1
सूर्योदय से पहले सरगी
सूर्योदय से पहले, यदि कुल सरगी रखता हो, तो सास या अन्य वरिष्ठ ने जो अलग रखा हो वही लें — फल, मिष्ठान्न, या जो रीति हो उसका छोटा अंश। यही अंतिम ग्रहण है। थाली सरगी → पर लिखी है। उषा से निर्जला व्रत चंद्रोदय के अर्घ्य तक चलता है। सरगी न आए तो दिन शांत आरंभ करें।
- 2
संकल्प
प्रातः स्नान के बाद बैठकर सामान्य शब्दों में संकल्प बोलें: शरीर साथ दे तो निर्जला व्रत, पति के कल्याण और घर की शांति हेतु, समापन सच्चे चंद्रोदय के अर्घ्य पर। चिकित्सक ने सीमा रखी हो तो उसे स्पष्ट कहें और जल रखें। जल या अक्षत छूकर दोहराएँ — ॐ गौरी शंकराय नमः / Om Gauri Shankaraya Namah।
- 3
गौरी पूजा
संध्या को पूजा थाली सामग्री लिस्ट → से सजाएँ: जल से भरा मिट्टी का करवा, पीतल या मिट्टी का कलश, रोली, अक्षत और पुष्प। घी का दीप जलाएँ और लौ के पास रहें। ॐ गौरी शंकराय नमः / Om Gauri Shankaraya Namah अर्पित करें, फिर तिलक। जय पार्वती माता → गाएँ। वही स्तुति, करवा चौथ के बिना, पार्वती आरती → पर है।
- 4
व्रत कथा
दीप जलता रहे, तब वीरावती की कथा → सुनें: सात भाई, छलनी के पीछे दीप, और सच्चे चंद्र की प्रतीक्षा। अकेले हों तो एक बार पढ़ लें। कथा अर्घ्य से पहले आती है।
- 5
छलनी से चंद्र अर्घ्य
जब चंद्र सचमुच उग आए — नगर का चंद्रोदय 29 अक्टूबर पंचांग → पर है — उसे छलनी से देखें। जल अर्पित करें: ॐ चंद्राय नमः / Om Chandraya Namah। कई घर उसी छलनी से पति को देखते हैं, और वे दूर हों तो उनके चित्र को।
- 6
पारण
पारण उसी अर्घ्य के बाद शुरू होता है। पहले जल लें, फिर हल्का ग्रास, और पूरे दिन के बाद पेट को अन्न से धीरे मिलाएँ। व्रत उषा से इसी चंद्रोदय अर्घ्य तक चलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- यदि चंद्र बादलों में हो तो?
जब तक घर सुख से बैठ सके, प्रतीक्षा करें। नगर के पंचांग पर चंद्रोदय बीत जाए और चंद्र फिर भी न दिखे, तो छलनी से उसी आकाश की ओर अर्घ्य दें — ॐ चंद्राय नमः / Om Chandraya Namah — और पारण करें। शरीर साथ न दे तो साफ दर्शन के लिए बाहर न ठहरें। समय 29 अक्टूबर पंचांग → पर है।
- सूतक या अशुद्धि में व्रत रख सकते हैं?
जन्म या मृत्यु के बाद कई कुल पूरी थाली पूजा रोक देते हैं: घर के वरिष्ठ वह विराम न उठाएँ तब तक मूर्ति नहीं छूते और मंदिर नहीं जाते। शांत संकल्प पर्याप्त है; वरिष्ठ अनुमति दें तो ढका दीप और जहाँ बैठे हों वहीं सुनी कथा। अशुद्धि विस्तृत विधि की सीमा है। प्रार्थना रद्द नहीं होती। कुल के शोक या जन्म-विश्राम का पालन करें।
- निर्जला के स्थान पर जल कौन रख सकता है?
जिसका शरीर निर्जल दिन न सह सके — गर्भावस्था, स्तनपान, रोग, वृद्धावस्था, या चिकित्सक की सलाह। संकल्प में यह सीमा कहें, जल के घूँट लें, और गौरी पूजा तथा चंद्र अर्घ्य फिर भी करें। फलाहार भी पूरा गृह व्रत है। व्रत दांपत्य की चिंता है। यह उपचार नहीं, और सहनशक्ति की परीक्षा नहीं।
- पारण का सही समय कब है?
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को सच्चे चंद्रोदय पर अर्घ्य के बाद। छलनी से चंद्र देखें, बादल छिपाएँ तो उसी दिशा अर्घ्य दें, फिर जल और हल्का पहला ग्रास लें। नगर का चंद्रोदय 29 अक्टूबर पंचांग → पर देखें। सूर्यास्त दूसरा समय है, और दूसरे नगर से नकल की गई घड़ी आपका पारण नहीं है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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