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देवशयनी एकादशी कथा — विष्णु की चातुर्मास निद्रा
आषाढ़ शुक्ल एकादशी: प्रभु शयन करते हैं, चातुर्मास आरंभ, गृहस्थ कोमल व्रत लेते हैं।

शयनी या हरि-शयनी भी। कथा एक चमत्कार नहीं, एक ऋतु है: विष्णु विश्राम में जगत शांततर धर्म रखता है।
आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर विष्णु सर्प-सिंधु पर शयन स्मरण हैं। विवाह और भारी नए आरंभ प्रबोधिनी तक पारंपरिक रूप से रुकते हैं। कथा कृष्ण का पांडवों से यह विश्राम वर्णन है: यहाँ निद्रा ब्रह्मांड का विश्वास है, उपेक्षा नहीं।
गृहस्थ छोटा चातुर्मास नियम लेते हैं — कम तामस अन्न, साप्ताहिक एकादशी, अधिक तुलसी। जो प्रभु सोते हैं उन्होंने ही चार मास करुणा में जागे रहने को कहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- निद्रा कब टूटती है?
- कार्तिक शुक्ल प्रबोधिनी (देवोत्थान) एकादशी पर। वह कथा जागरण है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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