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तुलसी पूजा विधि — पवित्र तुलसी की दैनिक और शुक्रवार आराधना

तुलसी पौधे की पूजा कैसे करें: जड़ में जल, परिक्रमा, दीप, और यह स्मरण कि बिना दल के विष्णु अर्पण अधूरा माना जाता है।

समय: 15–25 मिनट

पूजा वेदी का चित्र
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

तुलसी हरिप्रिया और लक्ष्मी का स्वरूप कही जाती हैं। शुक्रवार और कार्तिक संध्या विशेष प्रिय हैं। स्वच्छ आँगन का जीवित पौधा ही सच्ची मूर्ति है।

सामग्री

  • जीवित तुलसी का पौधा
  • जल, दीप, और ऐसा पुष्प जो झाड़ी को हानि न पहुँचाए
  • स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
  • धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
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पूजा के चरण

  1. 1

    जड़ सींचें

    प्रातः जड़ में जल दें — इतना नहीं कि तना सड़े। सूखे पत्र सावधानी से हटाएँ।

  2. 2

    दीप और प्रदक्षिणा

    संध्या में छोटा दीप जलाएँ, विशेषकर शुक्रवार। दक्षिणावर्त परिक्रमा करें। जानते हों तो तुलसी आरती पढ़ें।

  3. 3

    विष्णु हेतु दल

    विष्णु को नैवेद्य दें तो पौधा दे सके तो तुलसी दल रखें। कठोरता से न तोड़ें।

मंत्र

ॐ तुलस्यै नमः

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बालकनी के गमले की पूजा हो?
हाँ। आँगन से अधिक सूर्य, स्वच्छ जल और दैनिक स्मरण मायने रखते हैं।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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