ganesh · puja-vidhi
यात्रा आरंभ विधि — प्रस्थान से पूर्व प्रार्थना
संक्षिप्त प्रस्थान पूजा: कुलदेवता या गणेश, अधूरी नहीं पूरी पूजा, तथा भय रहित तिथि-स्मरण।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14
समय: 15–25 मिनट

पारिवारिक यात्रा से पहले इष्ट की पूर्ण प्रार्थना रखी जाती है ताकि मार्ग स्पष्ट मन से लिया जाए। परंपरा कुछ तिथियों को कोमल कहती है; आवश्यकता में सच्चे नमस्कार के बाद यात्रा निषिद्ध नहीं।
सामग्री
जो अभी बाकी है वही व्हाट्सऐप जाएगा — जो घर में है उसे टिक करें।
मुद्रित प्रति: pujasangrah.com — आपका पावन आध्यात्मिक साथी
पूजा के चरण
- 1
जो पूजा शुरू करें, पूरी करें
अधूरा अर्पण अशुभ माना जाता है। बैठक छोटी और पूर्ण रखें: दीप, पुष्प, नमस्कार।
- 2
निर्विघ्न मार्ग माँगें
गणेश और कुलदेवता से सुरक्षा, धैर्य और मार्ग की ईमानदारी माँगें। यात्रा लंबी हो तो संक्षिप्त हनुमान चालीसा पढ़ें।
- 3
सजग प्रस्थान
कई घर दाएँ पैर से निकलते हैं और द्वार पर कटु वचन नहीं कहते। तिथि पारंपरिक रूप से भारी हो तो एक नमस्कार और जोड़ें — आवश्यक यात्रा भय से न रद्द करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- कौन सी तिथियाँ पारंपरिक रूप से प्रिय हैं?
द्वितीया, तृतीया, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी प्रस्थान हेतु कोमल कही जाती हैं। अमावस्या और पूर्णिमा में अधिक सावधानी रखी जाती है। स्थानीय रीति और कर्तव्य निर्णय करते हैं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
संबंधित लेख

गणेश आरती — जय गणेश देवा
प्रतिदिन की पूजा और त्योहारों में गाई जाने वाली प्रिय गणेश आरती, विघ्नहर्ता की स्तुति।
और पढ़ें
गणेश मंत्र
गणेश मंत्र — गणेश के जप व गृह स्मरण हेतु हिंदी पाठ, कब जपें मार्गदर्शन सहित।
और पढ़ें
हनुमान चालीसा
तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान की स्तुति में चालीस छंद, साहस, रक्षा और भक्ति के लिए पाठित।
और पढ़ें
विष्णु आरती
Shri Vishnu Aarti (श्री विष्णु आरती )- ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ॐ..॥
और पढ़ें
हनुमान मंत्र
हनुमान मंत्र — हनुमान के जप व गृह स्मरण हेतु हिंदी पाठ, कब जपें मार्गदर्शन सहित।
और पढ़ें
गणेश चतुर्थी पूजा विधि — घर पर षोडशोपचार पूजा
विनायक चतुर्थी हेतु शांत गृह विधि: मध्याह्न मुहूर्त, षोडशोपचार के चरण, पारंपरिक मंत्र, तथा विसर्जन या उत्थापन।
और पढ़ें
संपूर्ण पूजा विधि — दैनिक गृह पूजा
पूर्ण द्विभाषी गृह विधि: कब बैठें, किस दिशा में मुख करें, पंचोपचार से षोडशोपचार, तथा पारंपरिक आरंभिक मंत्र।
और पढ़ें