अगस्त–सितंबर
गणेश चतुर्थी
भगवान गणेश का स्वागत — मोदक, आरती और विघ्नहर प्रार्थनाएँ।
गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता के आगमन का उत्सव है। घरों और पंडालों में मिट्टी की मूर्ति स्थापित होती है, मोदक अर्पित होते हैं, और गणेश आरती गूंजती है।
सरल गृह विधि — संकल्प, पुष्प, धूप और सच्चा नमस्कार — श्रद्धा से पर्याप्त है। कई परिवार डेढ़, तीन, पाँच, सात या ग्यारह दिन बाद विसर्जन करते हैं।
यह पर्व सिखाता है कि आरंभ पवित्र है: गणेश से शुरू करें, मार्ग स्वयं खुलता है।
इस त्योहार के लिए पाठ

गणेश आरती — जय गणेश देवा
प्रतिदिन की पूजा और त्योहारों में गाई जाने वाली प्रिय गणेश आरती, विघ्नहर्ता की स्तुति।
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गणेश चालीसा
गणेश चालीसा: जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥
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गणेश मंत्र
Vakratunda Mahakaya Lyrics: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
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गणेश पूजा विधि — सरल गृह पूजा
गृह पर गणेश पूजा करने की चरणबद्ध विधि, दैनिक पूजा या गणेश चaturthi जैसे विशेष अवसरों के लिए।
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गणेश को मोदक प्रिय क्यों — ज्ञान और माधुर्य की कथा
मोदक गणेश का प्रिय भोग कैसे बना — ज्ञान, वात्सल्य और प्रसाद के आनंद से जुड़ी प्रिय कथा।
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