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संपूर्ण पूजा विधि — दैनिक गृह पूजा
पूर्ण द्विभाषी गृह विधि: कब बैठें, किस दिशा में मुख करें, पंचोपचार से षोडशोपचार, तथा पारंपरिक आरंभिक मंत्र।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14
समय: 40–70 मिनट

दैनिक पूजा सरल भी हो सकती है, संपूर्ण भी। ब्रह्म मुहूर्त श्रेष्ठ है; कठिन हो तो सूर्योदय के शीघ्र बाद बैठें। पूर्व या उत्तर मुख रखें। थाली की भीड़ से अधिक सच्ची श्रद्धा मायने रखती है।
सामग्री
जो अभी बाकी है वही व्हाट्सऐप जाएगा — जो घर में है उसे टिक करें।
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कब, कहाँ और कैसे बैठें
पूजा किसी भी समय हो सकती है, पर प्रातः मन शांत रहता है। गृह मंदिर हेतु ईशान कोण श्रेष्ठ माना जाता है। अन्यत्र बैठना पड़े तो मुख पूर्व या उत्तर रखें। आपदा में स्मरण ही पर्याप्त है — दिशा सहायक है, बंधन नहीं।
पूजा के चार परिचित रूप
पंचोपचार में पाँच भेंट हैं: चंदन, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य। दशोपचार में पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान और वस्त्र जुड़ते हैं। षोडशोपचार सोलह उपचार हैं — आभूषण, ताम्बूल, स्तवन, तर्पण और नमस्कार सहित। मानस पूजा पूर्णतः मन से होती है — कहीं भी संभव।
आरंभिक मंत्र
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
ॐ माधवाय नमः । ॐ केशवाय नमः । ॐ नारायणाय नमः ॥
ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
दैनिक क्रम
- 1
पवित्रीकरण और आसन
स्वच्छ कुश या ऊनी आसन पर बैठें। पवित्री मंत्र से स्वयं और सामग्री पर जल छिड़कें। विष्णु के तीन नामों से आचमन करें, फिर ॐ हृषीकेशाय नमः से हाथ धोएँ।
- 2
संकल्प और गणेश आवाहन
अक्षत, जल, रोली, सिक्का और पुष्प लें। नाम, ज्ञात हो तो गोत्र, स्थान और उद्देश्य कहें। पहले ॐ गणपतये नमः से गणेश का आवाहन करें, फिर शिव, दुर्गा, विष्णु, गुरु और नवग्रह का स्मरण करें।
- 3
कलश और दीप
ताँबे, पीतल या मिट्टी के कलश में जल, अक्षत, सिक्का और पुष्प रखें। पाँच पत्र और वस्त्र लपेटा नारियल स्थापित करें। जल में तीर्थों का आवाहन करें, फिर देवता की दाईं ओर दीप जलाएँ।
- 4
सोलह उपचार और आरती
आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, पुनः आचमन, ताम्बूल, आरती और प्रदक्षिणा अर्पित करें — समय कम हो तो पंचोपचार पर्याप्त है। क्षमा प्रार्थना से समाप्त करें।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या प्रतिदिन षोडशोपचार अनिवार्य है?
नहीं। दीप, एक पुष्प और ईश्वर का सच्चा नाम — लंबी विधि संभव न हो तो वही दिन की पूर्ण पूजा है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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