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प्रबोधिनी एकादशी कथा — विष्णु का जागरण
कार्तिक शुक्ल एकादशी: देवोत्थान, चातुर्मास समाप्ति, तुलसी विवाह काल, और व्रत के अनुरूप दान।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14

शयनी यदि पलक बंद है तो प्रबोधिनी खुलना है। कथा चार शांत मास के बाद धन्यवाद है।
कृष्ण कार्तिक शुक्ल एकादशी को प्रभु का उठना कहते हैं। जिसने चातुर्मास नियम रखा वह उसका दर्पण-दान देता है — भूमि-शयन किया हो तो कंबल, तेल छोड़ा हो तो घी, बिना दबाव स्वर्ण या अन्न।
तुलसी विवाह प्रायः इसी तिथि के निकट है: तुलसी का विष्णु से ब्याह ताकि घर के शीत दीपों की वधू हो। कथा जागरण पर समाप्त: साधारण काम पर लौटो, जो कोमलता साधी उसे व्यर्थ न करो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या प्रबोधिनी पर तुलसी विवाह अनिवार्य है?
कई क्षेत्रों में प्रिय है, कभी अगले दिन। रीति न हो तो विष्णु आरती और निभाया वचन पर्याप्त हैं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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