durga · puja-vidhi
गर्भ संस्कार विधि — कोमल गर्भकाल स्मरण
शांत गर्भकाल गृह साधना: सात्विक जीवन, संक्षिप्त दुर्गा या विष्णु जप, गीता श्रवण, और विश्राम — चिकित्सा का विकल्प नहीं।
समय: 15–25 मिनट

गर्भ संस्कार यह पुरा भाव है कि गर्भ घर सुनता है। कक्ष कोमल, आहार स्वच्छ, मंत्र छोटे रखें। दाई या चिकित्सक की सलाह सर्वदा आगे है।
सामग्री
- दुर्गा या विष्णु चित्र, गीता या कोमल स्तोत्र श्रवण
- फल, दूध, और धुआँ सह्य हो तो छोटा दीप
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
बिना तनाव बैठें
आरामदायक आसन चुनें। चिकित्सक सहमत न हों तो लंबा व्रत, भारी हवन धुआँ और रात्रि-जागरण न करें।
- 2
संक्षिप्त जप और श्रवण
ॐ दुं दुर्गायै नमः या ॐ नमो नारायणाय एक माला या उससे कम जपें। कुछ गीता श्लोक कोमल स्वर में सुनें।
- 3
आशीष, भय नहीं
गर्भ की ओर आशीष बोलें, भय-कथा नहीं। शक्ति हो तो दुर्गा आरती से समाप्त करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- किस मास से आरंभ करें?
- जब गर्भ इतना स्थिर हो कि छोटी बैठक सहज हो। शीघ्र तपस्या का कोई पुरस्कार नहीं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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