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गर्भ संस्कार विधि — कोमल गर्भकाल स्मरण
शांत गर्भकाल गृह साधना: सात्विक जीवन, संक्षिप्त दुर्गा या विष्णु जप, गीता श्रवण, और विश्राम — चिकित्सा का विकल्प नहीं।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14
समय: 15–25 मिनट

गर्भ संस्कार यह पुरा भाव है कि गर्भ घर सुनता है। कक्ष कोमल, आहार स्वच्छ, मंत्र छोटे रखें। दाई या चिकित्सक की सलाह सर्वदा आगे है।
सामग्री
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पूजा के चरण
- 1
बिना तनाव बैठें
आरामदायक आसन चुनें। चिकित्सक सहमत न हों तो लंबा व्रत, भारी हवन धुआँ और रात्रि-जागरण न करें।
- 2
संक्षिप्त जप और श्रवण
ॐ दुं दुर्गायै नमः या ॐ नमो नारायणाय एक माला या उससे कम जपें। कुछ गीता श्लोक कोमल स्वर में सुनें।
- 3
आशीष, भय नहीं
गर्भ की ओर आशीष बोलें, भय-कथा नहीं। शक्ति हो तो दुर्गा आरती से समाप्त करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- किस मास से आरंभ करें?
जब गर्भ इतना स्थिर हो कि छोटी बैठक सहज हो। शीघ्र तपस्या का कोई पुरस्कार नहीं।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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