navagraha · chalisa
नवग्रह चालीसा
नवग्रह चालीसा — स्तुति के चालीस हिंदी छंद। कब पाठ करें और भक्त से क्या अपेक्षा — संदर्भ सहित।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-18

यह चालीसा चालीस छंदों में नवग्रह की स्तुति है। दीप जलाकर नित्य पूजा या इस देवता के पर्व दिन पर, या जब घर इस देव स्मरण रखे, स्थिर ध्यान से पाठ करें। मार्ग स्तुति और समर्पण का है — भौतिक फल का सौदा नहीं। नीचे छंद भक्ति से पढ़ें; अर्थ बार-बार श्रवण से गहरा हो।
यदि नवग्रह की वेदी हो तो उसके समक्ष बैठें। संक्षिप्त संकल्प लें, शीघ्रता बिना पाठ करें, और रीति हो तो मौन या आरती से समापन करें।
चालीसा के छंद
॥ चौपाई ॥
श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय।
नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय।।
जय जय रवि शशि सोम बुध जय गुरु भृगु शनि राज।
जयति राहु अरु केतु ग्रह करहुं अनुग्रह आज।।
।। श्री सूर्य स्तुति ।।
प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा, करहुं कृपा जनि जानि अनाथा।
हे आदित्य दिवाकर भानू, मैं मति मन्द महा अज्ञानू।
अब निज जन कहं हरहु कलेषा, दिनकर द्वादश रूप दिनेशा।
नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर, अर्क मित्र अघ मोघ क्षमाकर।
।। श्री चन्द्र स्तुति ।।
शशि मयंक रजनीपति स्वामी, चन्द्र कलानिधि नमो नमामि।
राकापति हिमांशु राकेशा, प्रणवत जन तन हरहुं कलेशा।
सोम इन्दु विधु शान्ति सुधाकर, शीत रश्मि औषधि निशाकर।
तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा, शरण शरण जन हरहुं कलेशा।
।। श्री मंगल स्तुति ।।
जय जय जय मंगल सुखदाता, लोहित भौमादिक विख्याता।
अंगारक कुज रुज ऋणहारी, करहुं दया यही विनय हमारी।
हे महिसुत छितिसुत सुखराशी, लोहितांग जय जन अघनाशी।
अगम अमंगल अब हर लीजै, सकल मनोरथ पूरण कीजै।
।। श्री बुध स्तुति ।।
जय शशि नन्दन बुध महाराजा, करहु सकल जन कहं शुभ काजा।
दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना, कठिन कष्ट हरि करि कल्याणा।
हे तारासुत रोहिणी नन्दन, चन्द्रसुवन दुख द्वन्द्व निकन्दन।
पूजहिं आस दास कहुं स्वामी, प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी।
।। श्री बृहस्पति स्तुति ।।
जयति जयति जय श्री गुरुदेवा, करूं सदा तुम्हरी प्रभु सेवा।
देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी, इन्द्र पुरोहित विद्यादानी।
वाचस्पति बागीश उदारा, जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा।
विद्या सिन्धु अंगिरा नामा, करहुं सकल विधि पूरण कामा।
।। श्री शुक्र स्तुति।।
हे उशना भार्गव भृगु नन्दन, दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन।
भृगुकुल भूषण दूषण हारी, हरहुं नेष्ट ग्रह करहुं सुखारी।
तुहि द्विजबर जोशी सिरताजा, नर शरीर के तुमही राजा।
।। श्री शनि स्तुति ।।
जय श्री शनिदेव रवि नन्दन, जय कृष्णो सौरी जगवन्दन।
पिंगल मन्द रौद्र यम नामा, वप्र आदि कोणस्थ ललामा।
वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा, क्षण महं करत रंक क्षण राजा।
ललत स्वर्ण पद करत निहाला, हरहुं विपत्ति छाया के लाला।
।। श्री राहु स्तुति ।।
जय जय राहु गगन प्रविसइया, तुमही चन्द्र आदित्य ग्रसइया।
रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा, शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा।
सैहिंकेय तुम निशाचर राजा, अर्धकाय जग राखहु लाजा।
यदि ग्रह समय पाय हिं आवहु, सदा शान्ति और सुख उपजावहु।
।। श्री केतु स्तुति ।।
जय श्री केतु कठिन दुखहारी, करहु सुजन हित मंगलकारी।
ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला, घोर रौद्रतन अघमन काला।
शिखी तारिका ग्रह बलवान, महा प्रताप न तेज ठिकाना।
वाहन मीन महा शुभकारी, दीजै शान्ति दया उर धारी।
।। नवग्रह शांति फल ।।
तीरथराज प्रयाग सुपासा, बसै राम के सुन्दर दासा।
ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी, दुर्वासाश्रम जन दुख हारी।
नवग्रह शान्ति लिख्यो सुख हेतु, जन तन कष्ट उतारण सेतू।
जो नित पाठ करै चित लावै, सब सुख भोगि परम पद पावै।।
।। दोहा ।।
धन्य नवग्रह देव प्रभु, महिमा अगम अपार।
चित नव मंगल मोद गृह जगत जनन सुखद्वार।।
यह चालीसा नवोग्रह, विरचित सुन्दरदास।
पढ़त प्रेम सुत बढ़त सुख, सर्वानन्द हुलास।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- नवग्रह चालीसा कब पढ़ें?
नित्य पूजा या इस देवता के पर्व दिन पर, और नवग्रह से जुड़े पर्वों में। कई भक्त नित्य पाठ भी रखते हैं।
- क्या विशेष भोग आवश्यक है?
स्वच्छ स्थान और सच्चा स्वर पर्याप्त है। पुष्प, धूप और सात्विक प्रसाद परिवार रीति अनुसार।
- क्या नवसाधक धीरे पाठ कर सकते हैं?
हाँ — गति से अधिक स्पष्टता और श्रद्धा। एक बार ध्यान से चालीसा पूरी करें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
संबंधित लेख

नवग्रह आरती
shree Navgrah Aarti (नवग्रह आरती)- आरती श्री नवग्रहों की कीजै । बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै ।।
और पढ़ें
जन्मदिन पूजा विधि — दीपदान और इष्ट पूजन
वैदिक झुकाव वाली जन्मदिन बैठक: गणेश, इष्टदेव, वैकल्पिक नवग्रह स्मरण, सूर्य अर्घ्य, और दीर्घायु हेतु दीप।
और पढ़ें
शांति पूजा विधि — मानसिक शांति हेतु गृह कर्म
गृह शांति बैठक: गणेश, विष्णु और शिव स्मरण, कलश, वैकल्पिक छोटा हवन, और आरती।
और पढ़ें
लक्ष्मी गणेश आरती 2026: दीपावली क्रम, मंत्र (8 नवंबर)
रविवार 8 नवंबर 2026 की दीपावली लक्ष्मी–गणेश आरती का क्रम: पहले गणेश, फिर लक्ष्मी — पारंपरिक मंत्र और पूरी आरती के लिंक।
और पढ़ें
दुर्गा आरती — जय अम्बे गौरी
देवी अम्बे गौरी की स्तुति में क्लासिक दुर्गा आरती, दुष्टों का संहार करने वाली और आशीर्वाद देने वाली दिव्य माता।
और पढ़ें
दीपावली पूजा सामग्री लिस्ट हिंदी में
रविवार 8 नवंबर 2026 की दीपावली पूजा सामग्री हिंदी और अंग्रेज़ी में: लक्ष्मी–गणेश, दीप, सिक्के, मिष्ठान्न, और संध्या की थाली।
और पढ़ें
घटस्थापना विधि 2026 — घर पर कलश स्थापना
शरद नवरात्रि 2026 की घटस्थापना, 11 अक्टूबर: जौ, कलश, नारियल, संकल्प, और नौ रात्रियों का दीप।
और पढ़ें