vishnu · bhajan
वैष्णव जन तो तेने कहिये — नरसिंह मेहता भजन
नरसिंह मेहता का गुजराती भजन उस वैष्णव पर जो दूसरे का दर्द जानता है — एकादशी और किसी भी विष्णु बैठक में गाया जाता है।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14

बैठकर गाएँ; कमरा छोटा हो तो बिना ताली। गुजराती पंक्तियाँ रखें — अर्थ आचरण है, अनुवाद-स्पर्धा नहीं।
यह भजन चरित्र की नाप है। एकादशी पर विष्णु आरती के बाद एक बार पूरा गाएँ। अंतिम पद नरसैयो का नाम लेता है; उठने से पहले एक श्वास छोड़ें।
भजन के बोल
वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीड परायी जाणे रे
पर दुःखे उपकार करे तो ये, मन अभिमान न आणे रे
सकल लोकमां सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे
वाच काछ मन निश्चळ राखे, धन धन जननी तेनी रे
समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे
जिह्वा थकी असत्य न बोले, परधन नव झाले हाथ रे
मोह माया व्यापे नहि जेने, दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे
रामनाम शुं ताली रे लागी, सकल तीरथ तेना तनमां रे
वणलोभी ने कपटरहित छे, काम क्रोध निवार्या रे
भणे नरसैयो तेनुं दरसन करतां, कुल एकोतेर तार्या रे
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- गाते समय गुजराती का अनुवाद करें?
मूल पंक्तियाँ गाएँ। सभा गुजराती से अपरिचित हो तो आरंभ से पहले हिन्दी या अंग्रेज़ी अर्थ एक बार पढ़ें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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