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हनुमान का जन्म
हनुमान का जन्म — अंजना, केसरी और वायु की कृपा। मंगलवार पाठ व साहस हेतु यह कथा क्यों जरूरी है।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-18

हनुमान अंजना के पुत्र और केसरी के बालक के रूप में स्मरणीय हैं, पवनदेव वायु की कृपा से — अतः पवनसुत। जन्म कथा उनके बल, राम-भक्ति और आदर्श सेवक स्थान को समझाती है। हनुमान चालीसा या मंगलवार पूजा से पहले पढ़ें; कथा अहंकार बिना साहस स्थिर करे।
यह कथा बताती है कि अंजना की तपस्या और केसरी के घर में वह बालक कैसे आए जो राम के परम सेवक बने। विवरण कथक अनुसार बदलते हैं; सार कृपा और भक्ति का मिलन है।
बहुत समय पहले, अंजना एक अप्सरा थी जिसे वानर रूप में पृथ्वी पर रहने का शाप मिला। उसने वानर सेनapati केसरी से विवाह किया। दोनों ने भक्तिपूर्वक दिव्य संतान की प्रार्थना की।
दिव्य वरदान
अंजना की भक्ति से प्रसन्न होकर वायु देव ने शिव के आशीर्वाद का सार उन्हें प्रदान किया। इस प्रकार हनुमान का जन्म हुआ — अंजना के पुत्र, वायु के आशीर्वाद से, और शिव की शक्ति के अवतार।
बाल्य में हनुमान ने उगते सूर्य को पका फल समझकर निगलने हेतु छलांग लगाई। इंद्र ने वज्र से प्रहार किया, और वायु ने शोक में वायु रोक ली। देवताओं ने हनुमान की शक्ति पुनर्स्थापित की और उन्हें अमरत्व तथा अद्वितीय भक्ति का वरदान दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- हनुमान के माता-पिता कौन हैं?
माता अंजना और पिता केसरी; दिव्य कृपा से वायु-पुत्र (पवनसुत) भी कहे जाते हैं।
- यह कथा कब पढ़ें?
मंगलवार, हनुमान जयंती, या चालीसा और सुंदरकाण्ड पाठ से पहले।
- इस साइट पर हनुमान चालीसा कहाँ है?
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