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हनुमान जयंती पूजा विधि — चैत्र पूर्णिमा गृह पूजा
हनुमान जन्मोत्सव हेतु चैत्र शुक्ल पूर्णिमा की गृह विधि: लाल वेदी, सिंदूर, चालीसा, और संभव हो तो अभिजीत काल की पूजा।
समय: 45–75 मिनट

हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन अहंकार रहित राम-सेवा की शक्ति का सम्मान है। अभिजीत मुहूर्त प्रिय है; छूट जाए तो शांत हृदय की पूजा भी पूर्ण है।
सामग्री
- हनुमान मूर्ति या चित्र, संभव हो तो राम–सीता सहित
- लाल वस्त्र, सिंदूर, चमेली तेल और लाल फूल
- बूंदी लड्डू, गुड़ या फल प्रसाद
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
जयंती के चरण
- 1
स्थान शुद्ध करें
वेदी पोंछें। गंगाजल हो तो छिड़कें। लाल वस्त्र बिछाएँ और परिवार की परंपरा अनुसार हनुमान को विराजित करें।
- 2
पूर्णिमा पर संकल्प
हथेली में जल लें। साहस, स्वास्थ्य और दिखावे रहित सेवा का संकल्प करें। स्थानीय अभिजीत मुहूर्त ज्ञात हो तो उसी में आरंभ करें।
- 3
सिंदूर और दीप अर्पित करें
संक्षेप में गणेश का स्मरण करें, फिर ॐ हनुमते नमः से हनुमान का आवाहन करें। सिंदूर, तेल, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। उसी स्मरण में राम को रखें।
- 4
चालीसा, पाठ और आरती
हनुमान चालीसा पढ़ें। समय हो तो सुंदरकाण्ड का अंश पढ़ें। हनुमान आरती से समाप्त करें और प्रसाद बाँटें।
ॐ श्री हनुमते नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या हनुमान जयंती पर व्रत अनिवार्य है?
- फल व्रत प्रचलित है, अनिवार्य नहीं। मन स्वच्छ और पाठ स्थिर रखें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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