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हनुमान जयंती पूजा विधि — चैत्र पूर्णिमा गृह पूजा
हनुमान जन्मोत्सव हेतु चैत्र शुक्ल पूर्णिमा की गृह विधि: लाल वेदी, सिंदूर, चालीसा, और संभव हो तो अभिजीत काल की पूजा।
अंतिम अद्यतन: 2026-09-14
समय: 45–75 मिनट

हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन अहंकार रहित राम-सेवा की शक्ति का सम्मान है। अभिजीत मुहूर्त प्रिय है; छूट जाए तो शांत हृदय की पूजा भी पूर्ण है।
सामग्री
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जयंती के चरण
- 1
स्थान शुद्ध करें
वेदी पोंछें। गंगाजल हो तो छिड़कें। लाल वस्त्र बिछाएँ और परिवार की परंपरा अनुसार हनुमान को विराजित करें।
- 2
पूर्णिमा पर संकल्प
हथेली में जल लें। साहस, स्वास्थ्य और दिखावे रहित सेवा का संकल्प करें। स्थानीय अभिजीत मुहूर्त ज्ञात हो तो उसी में आरंभ करें।
- 3
सिंदूर और दीप अर्पित करें
संक्षेप में गणेश का स्मरण करें, फिर ॐ हनुमते नमः से हनुमान का आवाहन करें। सिंदूर, तेल, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। उसी स्मरण में राम को रखें।
- 4
चालीसा, पाठ और आरती
हनुमान चालीसा पढ़ें। समय हो तो सुंदरकाण्ड का अंश पढ़ें। हनुमान आरती से समाप्त करें और प्रसाद बाँटें।
ॐ श्री हनुमते नमः
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या हनुमान जयंती पर व्रत अनिवार्य है?
फल व्रत प्रचलित है, अनिवार्य नहीं। मन स्वच्छ और पाठ स्थिर रखें।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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