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vishwakarma · puja-vidhi

विश्वकर्मा पूजा विधि — कार्यशाला और औज़ार पूजन

कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा पूजा की गृह और कारखाना विधि: औज़ार स्वच्छ करें, दिव्य शिल्पी को अर्पण, आरती और प्रसाद।

अंतिम अद्यतन: 2026-10-28

समय: 40–60 मिनट

विश्वकर्मा, दिव्य शिल्पकार
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (विश्वकर्मा)

विश्वकर्मा पूजा दिव्य शिल्पी का सम्मान है — हाथ का शिल्प, किराये का तमाशा नहीं। अधिकतर उत्तर भारतीय कार्यशालाओं में यह कन्या संक्रांति पर पड़ता है। अगली: शुक्रवार, 17 सितंबर 2027। नागरिक दिन अपने नगर के पंचांग पर देखें। पहले सूची जुटाएँ: विश्वकर्मा पूजा सामग्री →। विश्वकर्मा आरती → से बंद करें।

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पूजा के चरण

  1. 1

    मशीन रोकें और औज़ार धोएँ

    फर्श को एक घंटे की शांति दें। जो पाली सचमुच चलाती है उसे धोएँ। धातु सुखाएँ ताकि जोड़ में जल न रहे। दिन का काम लैपटॉप या बही हो तो वही औज़ार है।

  2. 2

    विश्वकर्मा का आसन

    लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ। चित्र कर्मियों की ओर रखें, मशीन के पीछे न छिपाएँ। द्वार पर गणेश पहले से हों तो पहले उनका स्मरण — दूसरी मूर्ति ज़रूरी नहीं।

  3. 3

    संकल्प

    अपने शब्दों में: आज हम इन हाथों के शिल्प का सम्मान करते हैं, और माँगते हैं कि काम ईमानदार रहे। कुल परंपरा भिन्न हो सकती है। नाम सहित गृहस्थ व्रत संकल्प उपकरण → पर लिखा जा सकता है।

  4. 4

    औज़ारों को अर्पण

    चित्र पर और हल्के से औज़ारों पर रोली-अक्षत लगाएँ। पुष्प अर्पित करें। धूप और दीप जलाएँ जिसे देख सकें — लकड़ी की बेंच या तेल के पास लौ न छोड़ें। छोटा नमस्कार — ॐ विश्वकर्माये नमः — पर्याप्त है; यह पृष्ठ स्तोत्र नहीं रचता।

  5. 5

    आरती और प्रसाद

    विश्वकर्मा आरती → गाएँ। चालीस छंद हों तो विश्वकर्मा चालीसा → जोड़ें। मिष्ठान्न या फल निवेदन कर पाली में बाँटें। लौ बुझने के बाद ही मशीन चालू करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में विश्वकर्मा पूजा कब है?

शुक्रवार, 17 सितंबर 2027, अधिकतर उत्तर भारतीय कार्यशालाओं में कन्या संक्रांति पर। नागरिक दिन अपने नगर के पंचांग पर देखें। हब: विश्वकर्मा →।

क्या बिना पंडित बैठ सकते हैं?

हाँ। श्रद्धालु पाली औज़ार धोकर, पुष्प अर्पित कर, आरती गाकर, प्रसाद बाँट सकती है। लंबी पद्धति हेतु पंडित आमंत्रित करें।

क्या यह नए दफ़्तर की पूजा है?

नहीं। विश्वकर्मा शिल्प के औज़ारों का सम्मान है। कार्यशाला न हो तो नई मेज़ गणेश–लक्ष्मी–कुबेर से बैठे: नए कार्यालय की पूजा →।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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