dhanvantari · puja-vidhi
धनतेरस पूजा विधि — त्रयोदशी पर धन्वंतरी और कुबेर
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर धन्वंतरी और कुबेर की गृह पूजा: प्रदोषकाल दीप, अर्पण, और दीपावली का शांत आरंभ।
समय: 35–55 मिनट

धनतेरस दीपावली के दिनों का द्वार है। ‘धन’ धर्मयुक्त समृद्धि और आरोग्य है, ‘तेरस’ तेरहवीं तिथि। संध्या में दीप जलते हैं और दिव्य वैद्य तथा देवकोषाध्यक्ष का स्मरण होता है।
सामग्री
- धन्वंतरी और कुबेर की मूर्ति या चित्र
- लाल या पीला वस्त्र, दो घी दीप, सिक्के या छोटा धातु पात्र
- कुबेर हेतु श्वेत मिष्ठान्न, धन्वंतरी हेतु पीला मिष्ठान्न
- स्वच्छ जल, रोली, अक्षत और फूल
- धूप, घी या तेल दीप, कपूर और घंटी
पूजा के चरण
- 1
ईशान में आसन सजाएँ
संध्या के प्रदोष काल में ईशान में स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ। धन्वंतरी और कुबेर विराजित करें। प्रत्येक हेतु एक दीप जलाएँ।
- 2
गणेश से आरंभ करें
संक्षिप्त गणेश प्रार्थना से आरंभ निर्विघ्न होता है। फिर दोनों देवों को जल, रोली-अक्षत, पुष्प और धूप अर्पित करें।
- 3
भोग और जप
कुबेर को श्वेत मिष्ठान्न, धन्वंतरी को पीला भोग दें। शांत मन से दोनों के नाम जपें। परिवार के बैठे रहने तक दीप जलते रहें।
- 4
आरती और दीपावली की तैयारी
धन्वंतरी आरती और कुबेर आरती करें। प्रसाद बाँटें। अमावस्या की लक्ष्मी पूजा हेतु वेदी तैयार छोड़ें।
मंत्र
ॐ ह्रीं कुबेराय नमः। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- यदि प्रदोष काल छूट जाए तो?
- घर में शोर बढ़ने से पहले संध्या में पूजा करें। छूटे क्षण से अधिक त्रयोदशी की सच्चाई मायने रखती है।
आज का पंचांग
इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।
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