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baglamukhi · chalisa

बगलामुखी चालीसा

बगलामुखी चालीसा — स्तुति के चालीस हिंदी छंद। कब पाठ करें और भक्त से क्या अपेक्षा — संदर्भ सहित।

अंतिम अद्यतन: 2026-09-18

देवी बगलामुखी
चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स (बगलामुखी)

यह चालीसा चालीस छंदों में बगलामुखी की स्तुति है। दीप जलाकर नित्य पूजा या इस देवता के पर्व दिन पर, या जब घर इस देव स्मरण रखे, स्थिर ध्यान से पाठ करें। मार्ग स्तुति और समर्पण का है — भौतिक फल का सौदा नहीं। नीचे छंद भक्ति से पढ़ें; अर्थ बार-बार श्रवण से गहरा हो।

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यदि बगलामुखी की वेदी हो तो उसके समक्ष बैठें। संक्षिप्त संकल्प लें, शीघ्रता बिना पाठ करें, और रीति हो तो मौन या आरती से समापन करें।

चालीसा के छंद

नमो महाविद्या बरदा , बगलामुखी दयाल।

नमो नमो पीताम्बरा भवानी , बगलामुखी नमो कल्याणी।

अमृत सागर बीच तुम्हारा, रत्न जडि़त मणि मंडित प्यारा।

स्वर्णभूषण अति सुन्दर धारे, सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे।

भैरव करे सदा सेवकाई, सिद्ध काम सब विघ्न नसाई।

तुम काली तारा भुवनेशी, त्रिपुर सुन्दरी भैरवी वेशी।

सकल शक्तियां तुम में साजे, ह्रीं बीज के बीज बिराजे।

दुष्टोच्चाटन कारक माता, अरि जिव्हा कीलक सघाता ।

मुद्गर शिला लिए अति भारी, प्रेतासन पर किए सवारी।

अरि अरिष्ट सोचे जो जन को, बुद्धि नाशकर कीलक तन को।

चोरों का जब संकट आवे, रण में रिपुओं से घिर जावे।

मूठ आदि अभिचारण संकट, राजभीति आपत्ति सन्निकट।

सुमरित राजद्वार बंध जावे, सभा बीच स्तम्भवन छावे।

सर्व रोग की नाशन हारी, अरिकुल मूलच्चाटन कारी।

तुमको सदा कुबेर मनावे, श्री समृद्धि सुयश नित गावें।

यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता , शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता।

जो तुमको सुमरै चितलाई, योग क्षेम से करो सहाई ।

पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी, अर्थ न आखर करहूं निहोरी।

जग में केवल तुम्हीं सहारा, सारे संकट करहुं निवारा।

सोम्य रूप धर बनती माता, सुख सम्पत्ति सुयश की दाता।

नमो महाविधा आगारा, आदि शक्ति सुन्दरी आपारा।

रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बगलामुखी चालीसा कब पढ़ें?

नित्य पूजा या इस देवता के पर्व दिन पर, और बगलामुखी से जुड़े पर्वों में। कई भक्त नित्य पाठ भी रखते हैं।

क्या विशेष भोग आवश्यक है?

स्वच्छ स्थान और सच्चा स्वर पर्याप्त है। पुष्प, धूप और सात्विक प्रसाद परिवार रीति अनुसार।

क्या नवसाधक धीरे पाठ कर सकते हैं?

हाँ — गति से अधिक स्पष्टता और श्रद्धा। एक बार ध्यान से चालीसा पूरी करें।

आज का पंचांग

इस पाठ के लिए तिथि, मुहूर्त और आज के पर्व।

पंचांग गणना हो रही है…

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