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बगलामुखी चालीसा
मां बगलामुखी चालीसा हिंदी में पढ़ें। जानें बगलामुखी जयंती 2025 की तिथि, महत्व, पूजा विधि, स्तंभन मंत्र और शत्रु विजय के अचूक उपाय।

बगलामुखी चालीसा को अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाकर श्रद्धा से पाठें।
श्रद्धा से प्रत्येक छंद पर ध्यान देते हुए पाठ करें। चालीसा का पाठ प्रतिदिन या विशेष अवसरों पर किया जाता है।
चालीसा के छंद
नमो महाविद्या बरदा , बगलामुखी दयाल।
नमो नमो पीताम्बरा भवानी , बगलामुखी नमो कल्याणी।
अमृत सागर बीच तुम्हारा, रत्न जडि़त मणि मंडित प्यारा।
स्वर्णभूषण अति सुन्दर धारे, सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे।
भैरव करे सदा सेवकाई, सिद्ध काम सब विघ्न नसाई।
तुम काली तारा भुवनेशी, त्रिपुर सुन्दरी भैरवी वेशी।
सकल शक्तियां तुम में साजे, ह्रीं बीज के बीज बिराजे।
दुष्टोच्चाटन कारक माता, अरि जिव्हा कीलक सघाता ।
मुद्गर शिला लिए अति भारी, प्रेतासन पर किए सवारी।
अरि अरिष्ट सोचे जो जन को, बुद्धि नाशकर कीलक तन को।
चोरों का जब संकट आवे, रण में रिपुओं से घिर जावे।
मूठ आदि अभिचारण संकट, राजभीति आपत्ति सन्निकट।
सुमरित राजद्वार बंध जावे, सभा बीच स्तम्भवन छावे।
सर्व रोग की नाशन हारी, अरिकुल मूलच्चाटन कारी।
तुमको सदा कुबेर मनावे, श्री समृद्धि सुयश नित गावें।
यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता , शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता।
जो तुमको सुमरै चितलाई, योग क्षेम से करो सहाई ।
पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी, अर्थ न आखर करहूं निहोरी।
जग में केवल तुम्हीं सहारा, सारे संकट करहुं निवारा।
सोम्य रूप धर बनती माता, सुख सम्पत्ति सुयश की दाता।
नमो महाविधा आगारा, आदि शक्ति सुन्दरी आपारा।
रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल।
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