बालकाण्ड · 36
श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जी का जनकपुर में प्रवेश
बालकाण्ड का प्रकरण 36: श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जी का जनकपुर में प्रवेश। गोस्वामी तुलसीदास के मूल पद।
चौपाई · 1
चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा॥ गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई॥1॥
चौपाई · 2
तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए॥ हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया॥2॥
चौपाई · 3
पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी॥ बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना॥3॥
चौपाई · 4
गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा॥ बरन बरन बिकसे बनजाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता॥4॥
दोहा
सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास। फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास॥212।
चौपाई · 1
बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई॥ चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी॥1॥
चौपाई · 2
धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठे सकल बस्तु लै नाना। चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई॥2॥
चौपाई · 3
मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें॥ पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता॥3॥
चौपाई · 4
अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू॥ होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी॥4॥
दोहा · 213
धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति। सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति॥213॥
चौपाई · 1
सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा॥ बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रख संकुल सब काला॥1॥
चौपाई · 2
सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे॥ पुर बाहेर सर सरित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा॥2॥
चौपाई · 3
देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई। कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना॥3॥
चौपाई · 4
भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनि बृंद समेता॥ बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए॥4॥
दोहा · 214
संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति। चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति॥214॥
गोस्वामी तुलसीदास के मूल पद।